शासनतंत्र को पटरी पर लाने के लिए करना पड़ रहा है संघर्ष : मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल

मेरी परीक्षा शुरू हुई है, उत्तीर्ण हो पाया तो अपने को मानूंगा सफल,नये साल में मंत्रिमंडल का विस्तार, मैंने बाजार में सब्जियां भी बेची है, हिंदू शरणार्थियों के मुद्दे पर ही विस चुनाव में मिला जनादेश सहित अनेक मुददों के साथ असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के सता में आने के बाद व इससे पहले की जिंदगी के अनछुए पहलुओं पर विशेष बातचीत की वरिष्ठ पत्रकार राजीव कुमार सिंघी ने ……..

*असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से छह महीने सरकार चलाने के बाद आप संतुष्ट है ? आप ने जैसा सोचा था, वैसे सरकार चल रही है या कोई समस्या है?
– शासन तंत्र में अराजकता आ गयी थी। नीति नियमों का उल्लंघन कर कई काम किये गये। दिसपुर, जिला स्तर, प्रखंड स्तर, पंचायत स्तर में घोर अनियमितताएं हुईं। अब इन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आम जनता सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार बढ़ने से कष्ट झेल रही थी। गरीब लोगों की सरकारी कार्यालयों में कोई पूछ नहीं थी। कुछेक बिचौलिए पूरी शासन व्यवस्था को ही निगल चुके थे। इसके चलते शासन व्यवस्था के प्रति लोगों का मोहभंग हो गया था। यह विश्वास वापस लौटा लाने के लिए हम पिछले कुछ दिनों सेकाफी संघर्ष कर रहे हैं। कष्ट करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में और अधिक कष्ट करना पड़ेगा, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार की जितनी योजनाएं हैं, वे शहर, गांव, चाय बागान, चर इलाकों के लिए हैं। इन योजनाओं से पहाड़ी, मैदानी और सभी जगहों पर रहने वाले लोगलाभान्वित हों, इसके लिए शासन-व्यवस्था से भ्रष्टाचार को दूर करना होगा। सभी स्तर पर, मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जमीनी स्तर तक भ्रष्टाचार खत्म करना होगा और सभी को कार्यक्षम बनाना होगा। कार्यदक्षता बढ़ानी होगी। अधिकारी, कर्मचारी, मंत्री, विधायक, सांसद, पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधि, नगर समिति, नगरनिगम के चुने हुए प्रतिनिधियों समेत सभी की कार्यदक्षता बढ़ानी होगी, तभी जनता लाभान्वित होगी। इसी उद्देश्य को आगे रख हम पिछले छह महीनों से संघर्ष कर रहे हैं। इसके लिए हमें बार-बार समीक्षा बैठकें करनी पड़ रहीहैं। सभी स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों व विभागीय मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श करना पड़ रहा है। हमने राज्य के बौद्धिक तबके से भी सुझाव लिये हैं। अब तक सरकार की ओर से उठाये गये कदमों में जनता शामिल हुई है और जनता के सहयोग से हम कुछ कार्यों मेंसफलता पाने में कामयाब हुए हैं। अतिक्रमण हटाया जाना इनमें शामिल है। काजीरंगा से लेकर मोरीगांव, दरंग, सिपाझार, श्रीश्री शंकरदेव के जन्मस्थान बटद्रवा में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इन अतिक्रमण विरोधी अभियानों में जनता का सहयोग मिलने सेइनमें सफलता हाथ लगी। इसके अलावा चुनाव के दौरान हमने जो वायदे किये थे, उनको भी लागू कर रहे हैं। इनमें भारत-बांग्लादेश सीमा को सील करना, एनआरसी का अद्यतन शामिल है। जनता का सहयोग इनमें मिल रहा है। हम इन कामों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था-सर्व आनंद यानि सर्वानंद। आप जब पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे तब असम की जनता मोदीजी के कहे अनुसार आनंदित होगी? क्या आप उस दिशा में बढ़ रहे हैं?

– समाज के सभी स्तरों के लोगोंको विश्वास में लेकर बराक-ब्रह्मपुत्र और पहाड़-समतल के वृहत असमिया समाज के बीच समन्वय की धारा मजबूत करने और एक जनगोष्ठी को दूसरी जनगोष्ठी द्वारा विश्वास में लेकर आगे बढ़ने के माहौल को बनाना है। इसलिए जाति, गोष्ठी, भाषा, धर्म से ऊपर उठ कर सभी को साथ लेकर ऐसे ही असम के निर्माण के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। जिस असम में हम परिवर्तन लाने की बात सोच रहे हैं, यह तभी संभव होगा, जब हमारे बीच समन्वय होगा। समन्वय के साथ ही हम कठोर परिश्रम करेंगे। परिवर्तन कामाहौल बनाना होगा। परिवर्तन का अर्थ है मन का परिवर्तन, संकीर्णता के परिवर्तन से। इसलिए लोगों के मन में जितनी मलिनता है, जितने भी संदेह, शंका, भय हैं, इन्हें दूर कर लोग खुले मन से असम में रह सके। असम की मिट्टी में, पूरे प्राकृतिक परिवेश में, भौगोलिकवातावरण में, वन संसाधन और संभावना का विकास कर असम के विकास के लिए अपने को लगा सकने वाला परिवर्तन। इसलिए मैं सोचता हूं कि इस बारे में निश्चित रूप से जनता ने सकारात्मक फैसला लिया है और हम सब सच्चाई और निष्ठा से काम करते रहे तो हमें जनताका समर्थन मिलता रहेगा।

*आईएमडीटी एक्ट खारिज होने के बाद आप असम के जातीय नायक बने। भाजपा से मुख्यमंत्री बनने के बाद आपको विपक्ष खलनायक बता रहा है। लेकिन आप इन पर समय जाया करने के बजाय अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। इतना धैर्य कैसे संभवहै ?
– मैंने कभी अपने को जातीय नायक नहीं समझा है। सोचना भी नहीं चाहिए। मैं जातीय नायक तब बनूंगा, जब मैं सर्वोच्च त्याग करुंगा। जीवन का सर्वोच्च त्याग देश के लिए, समाज के लिए, जाति के लिए करुंगा। सर्वोच्च त्याग तो मैंने नहीं किया है। इसलिए मैं समाज के लिए, सभी श्रेणी के लोगों के लिए, जाति के लिए अंतर्मन से साथ काम करने का प्रयास कर रहा हूं। जातीय नायक वे हैं, जो अपने जीवन में देश के हित, समाज हित, लोगों के हितों के लिए घोर विपत्तियां सहते हुए महान बलिदान देते हैं। वास्तव में वीर शहीद ही जातीय नायक होतेहैं। इन जातीय नायकोें का आदर्श हम अपनाएंगे। जीवन के रास्ते में हम भविष्य के समाज को गढ़ने के लिए प्रयास करते रहेंगे। इसलिए मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। मैंने कभी यह भावना मन में नहीं पाली। मैं यह नहीं हूं, यह मैं जानता हूं, क्योंकि एक जातीय नायक होने केलिए समस्त जनता के हृदय में जगह बनानी होगी। सभी लोगों का भरोसा जीतना होगा। मेरे गुरु ने मुझे यह सीख दी है। मुझे असम की जनता का प्यार मिला है और यही मेरी शक्ति का आधार है। इसलिए मैं जनता के प्रति अपनी श्रद्धाभक्ति रखकर सदैव काम करने के लिएइच्छुक हूं। किसी भी श्रेणी की जनता हमारे नेतृत्व से शंकित न हो या वे असुरक्षा के माहौल में न रहें, इसके लिए ही मैं प्रयास करता रहूंगा। सभी को काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण, खुले मन से काम करने का वातावरण बनाना ही हमारा प्रधान लक्ष्य है।
*आपके कई मंत्री, विधायक सांप्रदायिक टिप्पणी कर स्थितियां जटिल बनाते हैं, लेकिन आपको नुकसान हो सकता है, यह जानते हुए भी आप हार्डलाइन नहीं अपनाते। आगे भी आप ऐसे रह सकेंगे?
– हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने हमें जो नीति सौंपी है, जिस नीति के आधार पर समाज और देश को गढ़ने को कहा है, उसी को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। यह है सबका साथ, सबका विकास। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि समाज के सबसे दरिद्र कोतुम गले लगाना, शक्तिशाली करना, आर्थिक रूप से मजबूत करना, इज्जत देना और इन्हें सम्मान के साथ जीने का माहौल बना देना। इसलिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्श, महात्मा गांधी के आदर्श और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें जो नीति शिक्षा दी है, उसकेआधार पर हमें असम की 3 करोड़ 20 लाख लोगों की आस्था लेकर आगे बढ़ना होगा। भारत में रहने वाले लोगों के प्रति श्रद्धाभाव रखकर हमें कार्य करना पड़ेगा। भारतवर्ष को शक्तिशाली करने के लिए असम को शक्तिशाली बनाना पड़ेगा।
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आपके बीच बहुत समानता है। वे भी अकेले रहते हैं और आप भी। देर रात तक कार्य करना उनका भी शगल है। मोदीजी देश के लिए और आप असम के लिए कार्य कर रहे हैं। आपके परिवार के किसी व्यक्ति को भी राजनीतिया आपके साथ सक्रिय रूप में देखा नहीं जाता। इसके चलते ही राज्य में आप कार्य कर पा रहे हैं?
– मेरे माता-पिता

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