राजस्थान:अतुलनीय है राजस्थानी भाषा में टैस्सीटोरी का अवदान : डॉ.शर्मा

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एमजीएसयू : विद्यार्थियों ने किया राजस्थानी भाषा साहित्य, संस्कृति अकादमी और टैस्सीटोरी समाधि स्थल का दौरा 

बीकानेर। टैस्सीटोरी ने तुलसी और वाल्मिकी पर मौलिक शोधकार्य कर भारतीय शोधकर्ताओं को नई दशा-दिशा प्रदान की, वे विद्वान और भाषाविद् तो थे ही, इसके साथ साथ भारतीय कला, संस्कृति एवं  पुरातत्व के क्षेत्र में भी उनका योगदान अद्वितीय था। यह विचार वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार व विद्वान डाॅ. गिरिजा शंकर शर्मा ने टैस्सीटोरी की प्रतिमा तले एमजीएसयू के राजस्थानी विभाग द्वारा “एतिहासिक शख्सियत टैस्सीटोरी का राजस्थानी भाषा के उन्नयन में योगदान” विषय पर आयोजित द्वितीय विस्तार व्याख्यान में व्यक्त किए।

bikaner mgsu university, BIKANER MUSEUM,इससे पूर्व आयोजन समन्वयक राजस्थानी विभाग की प्रभारी डॉ. मेघना शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि एतिहासिक दृष्टि से जितना महत्व एल. पी. टैस्सीटोरी के कार्यों का भारत में रहा उसमें उनका सर्वाधिक अवदान राजस्थानी भाषा तथा संबंधित एतिहासिक तथ्यों को एक सूत्र में पिरोकर हस्तलिखित ग्रंथों के संपादन में रहा। विभाग के विद्यार्थियों ने इससे पूर्व महान इतालवी विद्वान टैस्सीटोरी की समाधि स्थल व गंगा संग्रहालय स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके राजस्थानी में अवदान के बारे में डाॅ. गिरिजा शंकर शर्मा से जानकारी प्राप्त की ।  विस्तार व्याख्यान का संयोजन करते हुए अतिथि व्याख्याता डाॅ नमामि शंकर आचार्य ने कहा कि टैस्सीटोरी का नाम राजस्थानी भाषा और साहित्य के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।

साथ ही साथ विद्यार्थियों ने आज बीकानेर स्थित राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी का भी भ्रमण किया जहां अकादमी सचिव डाॅ नितिन गोयल द्वारा अकादमी की निशुल्क वेबसाइट एवं मासिक पत्रिका जागती जोत के बारे में लैपटॉप पर डेमो देकर विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाई।  bikaner mgsu university, BIKANER MUSEUM,विभाग के ही अन्य अतिथि व्याख्याता डाॅ गौरीशंकर प्रजापत आभार ज्ञापन के साथ अपने संक्षिप्त संभाषण में बताया कि टैस्सीटोरी ने दीर्घकाल तक यहां की जलवायु संबंधी कठिनाइयों को सहते हुए विभिन्न घाटियों, धोरों, नगरों, मंदिरों, किलों इत्यादि की यात्राएं करते हुए भारत की पुरातात्विक संपदा के अंवेषण में अद्वितीय योगदान दिया। भ्रमण व व्याख्यान के दौरान अतिथियों में मोहम्मद फारूक चौहान के अतिरिक्त विभाग के विद्यार्थी उमा प्रजापत, जितेश शर्मा, प्रीती राजपुरोहित , सुमन सारस्वत,  टीकूराम, प्रकाश कडेला,  नितेश गोदारा, अन्नू,  पिया बाणियां, श्रृवण जाट, धर्मवीर,  विकास राठौड़,  अशोक नाथ, अमित ठाकुर, रूपसिंह सोढ़ा, भवानी सिंह,  देवीलाल, गोविंद सिंह,  नितेश शर्मा, किशन बिश्नोई,  भावना, दिनेश आदि शामिल रहे ।

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