‘अमृत मदर्स मिल्क बैंक’ दे रहा नवजात को जीवनदान

महात्मा गांधी अस्पताल एवं इनाया फाउण्डेशन का साझा प्रयास

जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल तथा इनाया फाउण्डेशन द्वारा स्थापित अृमत मदर्स मिल्क बैंक अब अब अपने प्रयासों से जरूरतमंद नवजात के लिए अमृत उपलब्ध करा कर उन्हें जीवनदान दे रहा है। पिछले दो माह में ही अस्पताल में संचालित इस बैंक द्वारा अब तक 27 लीटर से अधिक मदर्स मिल्क संकलित किया गया है तथा इससे लाभान्वित होने वाले नवजातों की संख्या भी  सौ से अधिक है, यह जानकारी महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एण्ड टैक्नोलॉजी के प्रार्चाय डॉ.जी.एन. सक्सैना ने एक प्रेस कान्फ्रेन्स में दी।DSC_1759

डॉ. सक्सैना ने कहा कि देश में हर 15 सैकण्ड में एक बच्चे की मौत हो रही हैं । तथ्य यह भी है कि 44 प्रतिशत बच्चे जन्म के समय कम वजन के पैदा होते है। ऐसे बच्चों को माता के अमृत का पोषण बहुत आवश्यक होता है। आंकडे यह भी बताते है कि 25 प्रतिषत बच्चों की मौत का कारण मां का दूध नहीं मिल पाना होता है।

इनाया फाउन्डेशन के उपाध्यक्ष जितेन्द्र निगम ने बताया कि 4 फरवरी 2016 से मदर्स मिल्क बैंक की सेवाएं संचालित की जा रही है। सेवाओं में मिल्क कलेक्शन, प्रोसेसिंग तथा स्टोरिंग तथा वितरण विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइड लाइन के अनुरूप किया जा रहा है। इसके लिए डोनर माता का ब्लड टेस्ट किया जाता है। सही पाये जाने पर उनका दुग्ध संकलित कर .4 डिग्री सेन्टीग्रेड पर फ्रीज किया जाता हैै। रूम तापमान पर सामान्य कर पाश्चुराइज किया जाता है, दुध यानि अमृत की कल्चर जांच की जाती है तथा उपयुक्त पाये जाने पर जरूरतमंद नौनिहालों को के लिए एकत्र किया जाता है।

महात्मा गांाधी अस्पताल की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति गर्ग ने बताया कि आम तौर पर दो से पंाच प्रतिषत माताएं बच्चे के बीमार होने या दूध नहीं पीने की वजह से अपने बच्चे को दूध नहीं पिला पाती है। ऐसे में जबकि दूध तो स्वतः ही बनता है। माता का दूध बन्द करने के लिए उन्हे मिल्क सप्रेसेन्ट दवा दी जाती है, जिसकी जरूरत अब नहीं रही। ऐसी माताएं अब मदर्स मिल्क बैक में डोनेट कर किसी जरूरतमंद बच्चे की जान बचचा सकती है। उन्होंने बताया कि वर्किंग मदर्स भी मदर्स मिल्क बैंक में डोनेट कर सकती है।

शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीष कक्कड तथा डॉ सौरभ सिंह ने बताया कि मां के दूध उपलब्ध करा कर देश में हर साल 10 लाख बच्चांे की जान बचाई जा सकती है। अनुमान के तौर पर 6 से 8 प्रतिशत बच्चे मां के दूध से वंचित रहते है ऐसे मैं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है तथा मृत्यु की संभावना भी अधिक हो जाती है। माता का दूध मिलने से बच्चे के जीवन की संभावनाओं को 6 गुना तक बढाया जा सकता है।,ऐसे में मदर्स मिल्क बैंक की सेवाएं मानवता की दिशा में किया गया एक गम्भीर प्रयास है, जिसके जरिये जरूरतमंद बच्चों को दूध उपलब्ध कराया जा सकता है।

इनाया फाउन्डेशन की सचिव नितिशा शर्मा ने बताया  कि मदर्स मिल्क बैंक में संकलित दूध को 24 घन्टे के दौरान सुरक्षित रूप से काम में लिया जा सकता हैे। शीघ्र ही इस मदर्स मिल्क बैंक से शहर के दूसरे अस्पतालों मंे भर्ती जरूरतमंद माताओं तथा शिशुओं को भी लाभान्वित किया जाएगा।