भाजपा नेता शेखावत ने मुख्यमंत्री को लिखा खत राजस्थानी को दूसरी राजभाषा बनाने की मांग

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बीकानेर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राजस्थानी भाषा (Rajasthani language)को आठवी अनुसूची में शामिल करके संवैधानिक मान्यता देने  की मांग पर भाजपा नेता और राजस्थानी मोट्यार परिषद के प्रदेश संयोजक सुरेंद्रसिंह शेखावत ने सूबे के मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राजस्थानी को राज्य में दूसरी राजभाषा बनाने की मांग करते हुए पत्र लिखा है।
शेखावत ने पत्र में मुख्यमंत्री का आभार जताया है कि राज्य की बरसो से लंबित मांग की तरफ ध्यान देते हुए प्रधानमंत्री जी से राज्यहित में मांग की है । शेखावत ने लिखा है कि निश्चित ही संवैधानिक मान्यता का मसला केंद्र का है मगर राज्य में राजस्थानी को दूसरी राजभाषा बनाने का अधिकार क्षेत्र राज्य सरकार के अधीन आता है ऐसे में मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सात करोड़ राजस्थानियों की बोली को आवाज देने के लिए शीघ्र राज्य सरकार राजस्थानी को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्रदान कर संरक्षित करे।
शेखावत ने पत्र में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा संस्कृति विभाग खोलने, राज्य के सभी महाविद्यालयों एवम उच्च माध्यमिक विद्यालयों में राजस्थानी संकाय शुरू करने एवम आरटीआई कानून के मुताबिक प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने हेतु प्राथमिक शिक्षा की भाषा राजस्थानी को बनाने की मांग की है ।
शेखावत ने राजस्थानी भाषा साहित्य एवम संस्कृति अकादमी की बदहाल हालात को ठीक करते हुए अध्यक्ष सहित प्रबंध कार्यकारिणी का गठन करने एवम राज्य लोक सेवा आयोग की आरएएस परीक्षा में राजस्थानी भाषा एवम संस्कृति का पेपर जुड़वाने की मांग भी की है। साथ ही रीट परीक्षा में आठवीं भाषा राजस्थानी जोड़ने एवम राजस्थानी फिल्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन का गठन करने की मांग भी पत्र में की है।
शेखावत ने संवैधानिक मान्यता के मसले पर राज्य की जनभावना को नेतृत्व देते हुए केंद्र पर दबाब बनाने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मसले पर सब लोग उनके नेतृत्व में एकजुट होकर संघर्ष के लिए तैयार है । पत्र में लिखा है कि 2003 में तत्कालिक गहलोत सरकार के समय में राजस्थानी भाषा की मान्यता हेतु सर्वसम्मति से पारित संकल्प की तर्ज पर सभी दल सरकार के साथ  खड़े रहेंगे ।