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सिर्फ स्वदेशी कंपनियों को मिले MSME का दर्जा

सिर्फ स्वदेशी कंपनियों को मिले MSME का दर्जा

नई दिल्ली। स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagaran Manch)और लघु उद्योग भारती (Laghu Udyog Bharati) ने मांग की है कि सिर्फ स्वदेशी उद्यमों को ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम का दर्जा दिया जाए। पिछले दिनों करीब 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा था कि एमएसएमई (MSME) के परिभाषा में बदलाव किया जाएगा। अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के समविचारी संगठनों लघु उद्योग भारती और स्वदेशी जागरण मंच ने सुझाव दिया है कि इस परिभाषा में इस शर्त को भी शामिल किया जाए कि उद्यम स्वदेशी है यानी उसका स्वामित्व भारतीय नागरिक के पास है और विदेशी उद्यमों को इस दायरे से बाहर रखा जाए।

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दोनों संगठनों ने यह भी मांग की है कि एमएसएमई से ट्रेडर्स, सर्विस प्रोवाइडर और प्रोफेशनल्स को अलग रखा जाए ताकि स्वदेशी स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले इसके भी प्रयास भी होने चाहिए। सरकार ने एमएसएमई को निवेश और सालाना टर्नओवर के आधार पर परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा है।

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लघु उद्योग भारती के महासचिव गोविंद लेले ने कहा, 'हम इस परिभाषा से सहमत हैं, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सिर्फ उन्हीं उद्यमों को एमएसएमई का दर्जा दिया जाए जिनका प्रभावी नियंत्रण भारतीय हाथों में है।'

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, 'इसमें उद्यमों की जगह इंडस्ट्री को रखना चाहिए. मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा नौकरियां मिलती हैं, इसलिए हमें उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। गैर मैन्युफैक्चरिंग फर्म को यदि एमएसएमई के दायरे में लाते हैं, तो सारे फायदे वही ले जाएंगे।' महाजन ने भी लघु उद्योग भारती की इस मांग का समर्थन किया कि सिर्फ भारतीय उद्यमों को ही एमएसएमई का दर्जा मिले।

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क्या है एमएसएमई की नई परिभाषा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के अनुसार, सूक्ष्म उद्यम की परिभाषा के तहत निवेश की सीमा 1 करोड़ रुपये और सालाना टर्नओवर की सीमा 5 करोड़ रुपये होगी। इसी तरह लघु उद्यमों के तहत निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये तक और टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ रुपये तक होगी। मध्यम उद्यम उसे माना जाएगा जिनमें निवेश 20 करोड़ रुपये तक और सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होगा।

अल्पसंख्यकों को गुमराह करने का चल रहा षड्यंत्र : आलोक कुमार

विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने ऑनलाइन पत्रकार वार्ता करते हुए कहा है कि देश में एक वर्ग विशेष से जुड़े हुए लोगों द्वारा अल्पसंख्यक वर्ग के मुस्लिमों एवं ईसाइयों को गुमराह करने का षड्यंत्र चलाकर उनके मन में असुरक्षा का भ्रम फैलाया जा रहा है। इसके कारण देश के मुस्लिम बहुल इलाकों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसी घटनाओं पर सरकारों को रोक लगाने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि सिविल सोसायटी के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले जानबूझकर अल्पसंख्यकों में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। इसके कारण जगह-जगह हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। चाहे बंगाल हो या असम, झारखंड हो या बिहार, कोई भी राज्य इससे अछूता नहीं हैं। इसलिए देश में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वाली शक्तियों को पहचान कर रोकने की जरूरत है। हिन्दुओं के पलायन पर कहा कि हरियाणा का मेवात तो एक उदाहरण है, जहां से हिंदू पलायन कर चुके हैं। देश के कई गांव ऐसे हैं जो हिंदू विहीन हो चुके हैं।

गुमराह करने वालों को करें बेनक़ाब

आलोक कुमार ने कहा कि विहिप कानून और शासन में विश्वास करती है। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का समर्थन नहीं करती है, परंतु सवाल उठता है कि जब देश में मॉब लिंचिंग का शिकार होने वाला कोई हिंदू होता है तब मानवाधिकार की दुहाई देने वाले लोग कहां चले जाते हैं। तब देश में क्यों नहीं कोई प्रदर्शन होता है।

उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जब आया तो मुस्लिम समाज के बीच भ्रम फैलाने का काम किया गया। इसी तरह धारा 370 को हटाने के समय किया गया। सीएए जब लाया गया तब भ्रम फैलाया गया कि देश में रहने के लिए मुस्लिमों से प्रमाण मांगे जाएंगे। इसलिए ऐसे लोगों को सबके सामने बेनकाब करने की जरूरत है।

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