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मानसून 2020 में टायफायड और इन्फ्लुएंजा के 50 फीसदी कम मामले आए (आईएएनएस स्पेशल)

मानसून 2020 में टायफायड और इन्फ्लुएंजा के 50 फीसदी कम मामले आए (आईएएनएस स्पेशल)

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के काले बादलों के बीच एक आशा की किरण नजर आई है कि इस साल राष्ट्रीय राजधानी में टाइफाइड और इन्फ्लुएंजा के मामलों में भारी कमी देखी गई है।

डॉक्टरों ने कहा है कि इस साल अस्पतालों में इन दोनों मौसमी बीमारियों के कम से कम 50 प्रतिशत कम मामले आए हैं।

द्वारका के आकाश हेल्थकेयर सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल ने कहा कि पिछले दो महीनों में उनके यहां टाइफाइड और इन्फ्लूएंजा के केवल 50 मरीज ही आए हैं। आम तौर पर मानसून के मौसम में यह गिनती 100 से 150 तक हो जाती है।

अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट विक्रमजीत सिंह ने बताया, हमें टाइफाइड के मामले नहीं मिल रहे हैं जो आमतौर पर इस मौसम में आते हैं।

शालीमार बाग के मैक्स सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में भी टाइफाइड से संबंधित मामलों में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इंटरनल मेडिसिन की कंसल्टेंट पारुल कक्कड़ ने कहा, हाल ही में फ्लू (इन्फ्लूएंजा) के मामले बढ़े हैं, ऐसा इस मौसम में होता है इसीलिए इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

राजेंद्र प्लेस के बीएलके अस्पताल में भी टाइफाइड और इन्फ्लुएंजा के मामलों में खासी कमी देखी गई है।

बीएलके के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रमुख और सीनियर डायरेक्टर राजिन्दर कुमार सिंघल ने कहा, मानसून के मौसम के दौरान आमतौर पर हर साल टाइफाइड के मामलों में वृद्धि हो जाती है और फिर मानसून के अंत तक कम हो जाती है। हालांकि इस साल ऐसा नहीं हुआ।

डॉक्टरों ने टाइफाइड और इन्फ्लूएंजा के मामलों में गिरावट के पीछे दो चीजों को जिम्मेदार बताया है। पहला, कोविड-19 महामारी के कारण स्वच्छता बढ़ी है और लोग घर का बना खाना ही खा रहे हैं।

कक्कड़ ने कहा, महामारी के दौरान हमारी जीवनशैली, खान-पान और सामाजिक शिष्टाचार बदल गए हैं। अच्छा है कि कुछ बदलाव फायदेमंद रहे, इससे इस साल टाइफाइड और हेपेटाइटिस के मामलों की संख्या में कमी आई है।

टाइफाइड और इन्फ्लूएंजा के मामलों में गिरावट के पीछे दूसरा कारण यह है कि कोविड-19 के डर कारण लोग अस्पताल आने से बच रहे हैं। साथ ही इन दोनों बीमारियों के लक्षण कोविड-19 के लक्षणों में शामिल हैं।

रोहिणी में धर्मवीर सोलंकी मल्टी-स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के संचालक पंकज सोलंकी कहते हैं, लोग चिंतित हैं कि अगर उनमें कोविड-19 की पुष्टि हो जाती है तो उन्हें आइसोलेशन में रहना पड़ सकता है या अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। इसी डर के कारण वे टाइफाइड और इन्फ्लुएंजा के बारे में भी नहीं बता रहे हैं।

कोविड-19 के लक्षण विशेष रूप से टाइफाइड और इन्फ्लुएंजा के समान हैं। टाइफाइड में लोगों को आमतौर 103-104 डिग्री बुखार बना रहता है (बुखार आता-जाता नहीं है)। साथ ही कुछ लोगों को दाने या गुलाबी रंग के धब्बे हो जाते हैं। खांसी और गले में खरास भी इसके लक्षण हैं।

सार्स-सीओवी-2 की तरह इन्फ्लुएंजा नाक, गले और फेफड़ों पर असर डालता है। इसमें रोगी को बुखार, सर्दी, कफ, गले में खरास, मांसपेशियों में दर्द और सांस की तकलीफ हेाती है।

(आईएएनएस)


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