बीकानेर : सिविल सेवा परीक्षाओं में हिंदी तथा भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की मांग 

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बीकानेर। भारतीय जनता पार्टी नेता सुरेंद्रसिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सिविल सेवा परीक्षाओं में हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हो रहे भेदभाव और नगण्य होते प्रतिनिधित्व पर चिंता जताते हुए भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की मांग की है ।
शेखावत ने पत्र में लिखा है कि आजादी के बाद से ही सिविल सेवा में अंग्रेजी भाषी अभिजात्य वर्ग का प्रभुत्व रहा है इसके पीछे मूल कारण परीक्षा प्रणाली में अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी जाती है ।
पत्र ने शेखावत ने उल्लेख किया है कि वर्ष 2000 से 2005 के मध्य लोक सेवा आयोग सहित सीडीएस और एनडीए परीक्षाएं हिंदी में होने लगी थी जिससे सकारात्मक परिणाम आए और भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व 25 से 30 फीसदी तक पहुंच गया था ।
वर्ष 2011 में किए गए परिवर्तन के बाद पुनः अंग्रेजी भाषी अभिजात्य वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ गया और भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व 2015 तक मात्र 5 से 10 फीसदी रह गया इसका मूल कारण मूल्यांकन पद्धति में किए जाने वाला भेदभाव पूर्ण पैटर्न है ।
वर्ष 2015 के बाद हिंदी सहित भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व 5 फीसदी से भी कम रह गया है जिससे ग्रामीण, वंचित ,कमजोर और पिछड़े वर्ग का हिस्सा नगण्य मात्र रह गया है ।
शेखावत ने प्रधानमंत्री को लिखा है कि आपकी सरकार हिंदी तथा भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की वकालत करती है इसलिए सिविल सेवा परीक्षाओं के पैटर्न में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है।
शेखावत ने पत्र में मांग कि है कि सिविल सेवा परीक्षाओं के प्रश्न पत्र मौलिक भाषा में बनाए जाए, मूल्यांकन हिंदी और भारतीय भाषाओं के विशेषज्ञों से करवाया जाए, साक्षात्कार में अंग्रेजी के प्रभुत्व को समाप्त किया जाए तथा प्रारंभिक परीक्षा में सी सेट पैटर्न में अंग्रेजी तथा गणित के भारांश को कम किया जाए। शेखावत ने पत्र की प्रति गृह मंत्री ,कार्मिक मंत्री सहित लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को भी भेजी है ।

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