Surya Grahan 2020 : कंकणाकृति सूर्यग्रहण पर इन राशि वाले लोगों को मिलेगा विशेष लाभ : – ज्योतिर्विद् विमल जैन

Surya Grahan 2020 Zodiac Sign people with these Zodiac will get special benefits in this solar eclipse

मिथुन राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग : चन्द्र, सूर्य, बुध और राहु
मेष, सिंह, वृश्चिक राशि एवं मीन राशि वाले होंगे विशेष लाभान्वित

कंकणाकृति सूर्यग्रहण(SuryaGrahan 2020) के रूप में आषाढ़ कृष्ण, अमावस्या, 21 जून, रविवार को दिखाई दे रहा है। यह ग्रहण आद्र्रा नक्षत्र एवं मिथुन राशि पर लगेगा, जिसकी वजह से मिथुन राशि विशेष प्रभावित होगी। जिनका जन्म मिथुन राशि एवं आद्र्रा नक्षत्र में है, उनके लिए यह ग्रहण शुभ फलदायी नहीं है उन्हें यह ग्रहण बिल्कुल नहीं देखना चाहिए। प्रख्यात ज्योतिॢवद् विमल जैन ने बताया कि ग्रहण का स्पर्शकाल भारतीय मानक समय के अनुसार 21 जून, रविवार को प्रात: 9 बजकर 16 मिनट पर प्रारम्भ हो जाएगा। काशी में प्रात: 10 बजकर 31 मिनट पर स्पर्श होगा। ग्रहण का मध्य 12 बजकर 17 मिनट पर, ग्रहण का मोक्षकाल दिन में 02 बजकर 04 मिनट पर होगा। ग्रहण की पूर्ण अवधि 3 घण्टा 34 मिनट होगी। ग्रहण के स्पर्श, मध्य एवं मोक्ष के समय स्नान करना चाहिए। इस बार रविवार के दिन सूर्यग्रहण पडने से ‘चूड़ामणि योग’ बन रहा है।

सूर्यग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पूर्व प्रारम्भ हो जाता है। यह सूर्य ग्रहण कंकणाकृति रूप में मध्य अफ्रीका, दक्षिण एशिया चीन, इण्डोनेशिया, माइक्रो एशिया और प्रशान्त महासागर में दिखेगा। जबकि खण्ड रूप में अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी यूरोप, एशिया में दृश्य होगा।

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ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि सूतक काल के आरम्भ होने के पूर्व मंदिरों के कपाट बन्द हो जाते हैं। सूतक काल में हास्य-विनोद, मनोरंजन, शयन, भोजन, देवी-देवता के मूॢत या विग्रह का स्पर्श करना, व्यर्थ वार्तालाप, अकारण भ्रमण, वाद-विवाद करना आदि वॢजत है। इस काल में यथासम्भव मौन-व्रत रहते हुए अपने दैनिक जरूरी कार्यों को सम्पन्न करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखना पूर्णतया वॢजत है। बालक व वृद्ध एवं रोगी पथ्य एवं दवा आदि ग्रहण कर सकते हैं। भोजन, दूध व जल की शुचिता के लिए उसमें तुलसी के पत्ते या कुश रखना चाहिए। यथासम्भव एकान्त स्थान पर अपने आराध्य देवी-देवता को स्मरण करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के पश्चात् स्नानोपरान्त देव-दर्शन करके यथासामथ्र्य दान करना चाहिए।

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यह ग्रहण मिथुन राशि एवं आद्र्रा नक्षत्र में होने के फलस्वरूप सूर्यग्रहण का प्रभाव विषम रहेगा। मिथुन राशि में चार ग्रहों चन्द्र, सूर्य, बुध और राहु की उपस्थिति रहेगी। यह ग्रहण विश्वपटल पर भी अपना विशेष प्रभाव छोड़ेगा। जिसके फलस्वरूप विश्व के अनेक राष्ट्र प्रभावित होंगे। राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में विशेष हलचल, शेयर, वायदा व धातु बाजार में घटा-बढ़ी के साथ उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। दैविक आपदाएँ, जल-थल वायु दुर्घटनाओं का प्रकोप तथा कहीं-कहीं पर आगजनी की आशंका रहेगी। कई देशों में सत्ता परिवर्तन व पक्ष-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप बढ़ेंगे। मौसम में भी अजीबो-गरीब परिवर्तन होगा। दैविक आपदाएँ भी प्रभावी रहेंगी। आॢथक व राजनैतिक घोटाले भी शासक-प्रशासक पक्ष के लिए सिर दर्द बनेंगे।

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ज्योतिॢवद विमल जैन ने बताया कि जिन जातकों को शनिग्रह की अढ़ैया अथवा साढ़ेसाती हो या जन्मकुण्डली के अनुसार ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा प्रतिकूल हो तथा सूर्यग्रह के साथ राहु या केतु हों, उन्हें ग्रहणकाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही सूर्यग्रह से सम्बन्धित मन्त्र का मानसिक जप करें तथा आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मन्त्र का जप करें।

सूर्यग्रहण से द्वादश राशियों का प्रभाव :-

मेष: कार्य प्रगति पर। दाम्पत्य जीवन में सुख शांति। धन संचय में रुचि। आनन्द की अनुभूति। बौद्धिक क्षमता का विकास। हर्ष भी।
वृषभ: प्रतिष्ठा पर आघात। क्रोध की अधिकता। दुर्घटना की सम्भावना। धन का अभाव। विश्वासघात की आशंका। व्यर्थ भ्रमण।
मिथुन: ग्रह स्थिति निराशाजनक। कार्यों में उदासीनता। मित्रों से मतभेद। पति-पत्नी में कटुता। वाहन से चोट-चपेट, दुर्घटना संभव।
कर्क: विश्वासघात की आशंका। प्रियजनों से अनबन। वाद विवाद की आशंका। कार्य-व्यवसाय में अड़चनें। यात्रा असंतोषजनक।
सिंह: प्रगति का मार्ग प्रशस्त। धन का लाभ। जीवन में मधुरता। नवीन कार्यों की योजना। आरोग्य सुख। यशमान प्रतिष्ठड्ढा में वृद्धि।
कन्या: कार्य व्यवसाय में निराशा। विचारों में उग्रता। स्पष्टड्ढवादिता घातक। स्वास्थ्य प्रतिकूल। विवाद से हानि। वाहन से कष्ट।
तुला:कार्यों में उदासीनता। क्रोध की अधिकता। दाम्पत्य जीवन में कटुता। आय में न्यूनता। योजना पूर्ति में बाधा। यात्रा से कष्टड्ढ।
वृश्चिक:धार्मिक गतिविधियों में रुचि। कार्यों के बनने से प्रसन्नता। उच्चाधिकारियों से सम्पर्क। लाभ की स्थिति। धार्मिक स्थलों की यात्रा।
धनु:विचारों में उग्रता। धन का अभाव। दाम्पत्य जीवन में असन्तोष। वाद-विवाद की आशंका। आरोप-प्रत्यारोप। नवयोजना अधूरी।
मकर: विरोधी प्रभावी। लाभार्जन का मार्ग अवरुद्ध। राजकीय पक्ष से कष्ट। कार्य क्षमता में कमी। धनागम में बाधा। मनोबल में कमी।
कुम्भ: लाभ में कमी। जोखिम से नुकसान। विश्वासघात की आशंका। एकाग्रता का अभाव। मानसिक अशांति। यात्रा से हानि।
मीन: आरोग्य सुख। जीवनसाथी से सामंजस्य। बौद्धिक क्षमता का विकास। भाग्योन्नति का मार्ग प्रशस्त। धाॢमक यात्रा का प्रसंग।

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