लिखित तथ्यों के साथ मौखिक साक्ष्यों का तुलनात्मक अध्ययन करे शोधार्थी-प्रो. भादाणी

डॉ. जगदीश नारायण ओझा की पुस्तक का हुआ विमोचन

बीकानेर। ‘शोध किसी साधना से कम नहीं है। एक सफल शोधार्थी में जिज्ञासा, एकाग्रता, समर्पण और निरंतरता जैसे गुण होने चाहिए। शोध विद्यार्थी को चाहिए कि वह लिखित तथ्यों के साथ मौखिक साक्ष्यों का तुलनात्मक अध्ययन करे और उनकी प्रमाणिकता को परखे।’
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एल. भादाणी ने रविवार को धरणीधर रंगमंच में डॉ. जगदीश नारायण ओझा की पुस्तक ‘बीकानेर में राजनीतिक जागृति व स्वतंत्रता आंदोलन बीकानेर षड़यंत्र केस के विशेष संदर्भ में’ के विमोचन समारोह में यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में बीकानेर की राजनीतिक चेतना की विकास यात्रा का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। इसमें बीकानेर राज्य के राजनीतिक इतिहास के परिचय, बीकानेर में राजनीतिक चेतना और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राजस्थान में 1857 से 1920 तक के स्वतंत्रता संग्राम के स्वरूप, स्वतंत्रता संग्राम में बीकोनर की संस्थाएं व संगठन, बीकानेर के सेनानियों का योगदान तथा चंदनमल बहड़ का योगदान और बीकानेर षड़यंत्र केस के विविध पहलुओं को सम्मिलित किया गया है।
पंडित जुगल किशोर ओझा ‘पुजारी बाबा’ ने कहा कि पुस्तक लेखन एक चुनौती भरा कार्य है। जगदीश नारायण ने इस पर खरे उतरे हैं। वरिष्ठ साहित्यकार शिवराज छंगाणी ने कहा कि शोध डाक्यूमेंट्स और कागजों तक सीमित ना रहे। शोध विद्यार्थी को विषय की गहराई में उतरने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा में रहने के लिए शोध का स्तर सुधारने की जरूरत है। इतिहास पर आधारित विषयों में शोध अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ओझा ने अपनी भूमिका का निर्वहन बखूबी किया है।
भाजपा के जिलाध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि डॉ. ओझा द्वारा लिखित पुस्तक के संदर्भ काबिले तारीफ हैं तथा इनसे लेखक द्वारा की गई मेहनत स्पष्ट झलकती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को देश के प्रमुख पुस्तकालयों में रखना चाहिए, जिससे इतिहास और शोध के विद्यार्थियों के लिए यह लाभदायक सिद्ध हो सके। डॉ. अजय कुमार जोशी ने कहा कि पुस्तक में शोध कुशलता परिलक्षित होती है तथा पुस्तक पाठकीय दृष्टिकोण से जीवंतता लिए है। ऐतिहासिक साक्ष्यों एवं पृष्ठभूमि पर आधारित यह पुस्तक पठनीय है।
रमक झमक डॉट कॉम के प्रहलाद ओझा ‘भैंरू’ ने कहा कि डॉ. जगदीश ने तथ्यों को सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जिसे प्रत्येक पाठक समझ सकता है। उन्होंने अतिथियों का परिचय तथा स्वागत उद्बोधन दिया। इससे पहले अतिथियों ने डॉ. ओझा की पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर नेचर टेककेयर मिशन सोसायटी द्वारा दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्राचार्य गौरव दुबे का सम्मान भी किया गया। डॉ. मुकेश हर्ष ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज कुमार जोशी ने किया।
इस अवसर पर उपमहापौर अशोक आचार्य, भाजपा आईटी सेल के प्रदेश संयोजक अविनाश जोशी, लक्ष्मीनारायण ओझा, डॉ. रितेश व्यास, डॉ. राजशेखर, डॉ. योगेश व्यास, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, प्रो. मुरली, सीए सुमित राठी, बेसिक कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष दिनेश ओझा, श्रीराम बिस्सा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।