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कला

  • देखो! मेहरबान बदला .......

    -नरेंद्र कंबोजवक्त बदला के इम्तिहान बदला,मेहरबानों का देखो मेहरबान बदला। रुक गया, पर फिर भी ना इंसान बदला, घूमता फिरता, शोर शराबा करता, अब बंद कमरे में, देखो ये जहान बदला। वक्त बदला के इम्तिहान बदला,मेहरबानों का देखो मेहरबान बदला। जरा सा उसने करतब किया,पुराने रोग का, देखो नाम बदला।हाय! कायनात ये...

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