सर्वोत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए संकल्पबद्ध राज्य सरकार

-हरि शंकर आचार्य

बीकानेर। प्रत्येक मरीज को समय पर सर्वोत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं मिलें, राज्य सरकार इसके लिए संकल्पबद्ध है। एक ओर जहां भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 30 हजार से 3 लाख रूपये तक का बीमा कवर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अत्याधुनिक तकनीकों और सुविधाओं से युक्त चिकित्सकीय संस्थानों ने मरीजों के दुःख-दर्द को बांटने का प्रयास किया है।

सरकार की इस कल्याणकारी नीति की अनुपालना में बीकानेर का पीबीएम अस्पताल भी नित नए आयाम स्थापित कर रहा है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध पीबीएम अस्पताल में पिछले दिनों पहली बार कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई, वहीं राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्राी राजेन्द्र राठौड़ ने पीबीएम अस्पताल परिसर में शिवकिसन मींडाराम गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, न्यूरोएलाइड एंड न्यूरोसाइसेंज सेंटर में 33.70 करोड़ की लागत से बनने वाले ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शिलान्यास किया, साथ ही 14.75 करोड़ की लागत से तैयार विभिन्न संस्थान आमजन को समर्पित किए।

देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल होगा पीबीएम

भारत सरकार द्वारा देश के चुनिंदा दस संस्थानों को ‘राष्ट्रीय मानसिक कार्यक्रम’ के स्कीम-ए के तहत ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य सरकार के अथक प्रयासों से सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग को इन संस्थानों में शामिल किया जा सका। ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के निर्माण के लिए 33.70 करोड़ रूपये व्यय होंगे। इस सेंटर के विकसित होेने के बाद यहां मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति क्षेत्रा में अत्याधुनिक सुविधाएं मिलना प्रारम्भ हो जाएंगी, जिसका लाभ बीकानेर संभाग और आस-पास के क्षेत्रा के रोगियों को मिलेगा। इसके साथ ही मनोचिकित्सा क्षेत्रा में मनोचिकित्सक, क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट, साईक्रेटिक सोशियल वर्कर एवं साईक्रेटिक नर्सिंग के कोर्सेज चालू होने से इनकी भारी कमी को दूर किया जा सकेगा। इससे आने वाले समय में मानसिक एवं नशा व्यसन रोगियों का और अधिक बेहतर इलाज हो पाएगा।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई

        पीबीएम अस्पताल परिसर में जनाना अस्पताल के समीप नई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई (एमसीएच विंग) का निर्माण 485 लाख रूपये की लागत से करवाया गया है। इस विंग को स्त्राी एवं प्रसूति विशिष्टता में आब्स्ट्रेटिक विंग के रूप में काम लिया जाएगा, जिसमें प्रसूति संबंधी रोगों का इलाज किया जाएगा। राज्य सरकार की मातृ एवं शिशु कल्याण की महत्ती योजनाएं तथा जननी शिशु सुरक्षा योजना और शुभ लक्ष्मी योजना के तहत संस्थागत प्रसवों की संख्या में बढ़ोतरी के अनुरूप महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।

बहुउद्देशीय अनुसंधान इकाई

देश के चुनिंदा आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों में शोध कार्यों के विकास के लिए आईसीएमआर और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पीबीएम अस्पताल के हल्दीराम मूलचंद कार्डियो वेस्कुलर संस्थान में तैयार बहुउद्देशीय अनुसंधान इकाई की स्थापना से गैर संक्रामक रोगों पर शोध कार्यों का मार्ग प्रशस्त होगा। इकाई को वर्तमान में 26 शोध कार्यों को रिसर्च कमेटी की अनुमति मिली है।

रिहेबिलिटेशन सेंटर और एनॉटोमी रिसर्च लेब

        पीबीएम अस्पताल में फिजिकल रिहेबिलिटेशन सेंटर 25 वर्षों से कार्य कर रहा था, लेकिन विभाग का भवन नहीं होने से मरीजों को आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसे ध्यान रखते हुए राज्य सरकार ने जयपुर के बाद राज्य का दूसरा रिहेबिलिटेशन सेंटर बीकानेर में स्थापित करने का निर्णय लिया। लगभग 3 करोड़ 50 लाख रूपये की लागत से तैयार रिहेबिलिटेशन विभाग के माध्यम से फिजियोथैरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट, प्रोस्थेटिस्ट, आर्थोटिस्ट व मेडिकल सोशियल वर्कर आदि की सुविधाएं मिल सकंेगी। इसी प्रकार उत्तर भारत में एम्स के बाद बेसिक साइंस में पहली एडवांस लेबोरेट्री ‘एनॉटोमी रिसर्च लेब’ बीकानेर में स्थापित की गई है। इससे इंफरटिलिटी, अनुवांशिक बीमारियों और स्टेम सैल से संबंधित कार्य किए जाएंगे, इससे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग के मरीजों एवं निःसंतान दंपतियों को लाभ होगा।

पहली बार हुआ कॉक्लियर इम्प्लांट

पीबीएम अस्पताल के कान, नाक, गला विभाग में गत दिनों पहली बार कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी होने के साथ ही संभाग के चिकित्सा जगत में नया अध्याय जुड़ गया। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संभाग के प्राइवेट और सरकारी दोनांे क्षेत्रों में पहली बार पीबीएम अस्पताल में ही की गई। इसके साथ ही सम्पूर्ण राजस्थान के राजकीय चिकित्सालयों में जयपुर और जोधपुर के बाद बीकानेर का पीबीएम अस्पताल ऐसी सुविधा वाला तीसरा संस्थान बन गया। राजस्थान सरकार की इस पहल से गरीब गूंगे और बहरे बच्चों के जीवन में आशा की नई किरण का संचार हुआ है। इस ऑपरेशन की लागत लगभग 5 लाख रूपये है, जिसके सम्पूर्ण खर्च का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।

सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी, बीकानेर