मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान से बदलेगी गांवों की तस्वीर और तकदीर-प्रभारी मंत्री

जल स्वावलम्बन सप्ताह के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित
बीकानेर। वन, पर्यावरण एवं खान राज्य मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान को सफल बनाने में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, भामाशाह, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा आमजन भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि इस पुनीत अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे तथा बरसात के बाद गांवों की तस्वीर और तकदीर बदल जाएगी।
रिणवा गुरूवार को जल स्वावलम्बन सप्ताह के तहत पंचायत समिति सभागार में आयोजित ‘जिला स्तरीय कार्यशाला’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज देश के अनेक क्षेत्र भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहे हैं। भू-जल का स्तर भी लगातार गिर रहा है, ऐसे में mjsa-1बरसाती जल का संरक्षण और बूंद-बूंद जल का समुचित उपयोग करना जरूरी है। इसे ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने ‘ड्रीम प्रोजे€ट’ के रूप में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान’ की शुरूआत की है। अभियान के तहत आगामी तीन वर्षों में राज्य के समस्त गांवों को जल उपलŽधता की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने इसे ‘भागीरथ प्रयास’ बताया तथा कहा कि सभी वर्गों के सहयोग के बिना इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि पहले चरण में बीकानेर की 17 ग्राम पंचायतों के 19 गांवों को सम्मिलित किया गया है। इन गांवों में शत-प्रतिशत कार्यों को निर्धारित समय पर पूर्ण करके दूसरे जिलों के समक्ष मिसाल प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार 17 से 24 अप्रैल तक जल स्वावलम्बन सप्ताह मनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी चयनित गांवों में हो रहे कार्यों का औचक निरीक्षण करें तथा आमजन को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से पारम्परिक जल स्त्रोतों के जीर्णोद्घार तथा क्षमता संवर्धन का कार्य भी किया जाएगा, जिससे इनका पुराना वैभव वापिस लौटेगा और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल की समस्या का स्थाई समाधान हो पाएगा।
जिला प्रभारी सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि एमजेएसए के तहत स्वीकृत सभी कार्यों को अतिशीघ्र प्रारम्भ तथा प्रगतिरत कार्यों को 30 जून से पहले पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में आमजन को पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिले, इसे ध्यान रखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा होती है, ऐसे में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाए। उन्होंने कहा कि अभियान से जुड़े विभिन्न विभाग भी समयसीमा का ध्यान रखें। यदि निर्धारित अवधि तक कोई कार्य पूर्ण नहीं होगा तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बीकानेर पंचायत समिति प्रधान राधा देवी सियाग ने इसे जनोपयोगी अभियान बताया तथा कहा कि उन्होंने अनेक कार्यों का निरीक्षण किया है। ग्रामीणों को इन कार्यों से प्रत्यक्ष लाभ होगा। नोखा पंचायत समिति के प्रधान कन्हैयालाल ने कहा कि ऐसे गांव, जिनकी आबादी अधिक है अथवा जहां जल भंडारण के पर्याप्त स्त्रोत नहीं हैं, उन्हें अभियान के तहत प्राथमिकता से लिया जाए। लूनकरनसर प्रधान गोविंदराम गोदारा ने कहा कि कार्यों में समयसीमा और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. एल. मेहरड़ा ने बताया कि अभियान के तहत जिले के 55 हजार 705 है€टेयर क्षेत्रफल में जल संरक्षण के 3 हजार 706 कार्य करवाने की स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। इन पर लगभग 54 करोड़ रूपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जलग्रहण के तहत 342, अनटाइड फंड के 523 तथा मनरेगा के 40 कार्य अब तक पूर्ण करवाए जा चुके हैं। शेष कार्यों के लिए समय सीमा का निर्धारण कर दिया गया है। अधीक्षण अभियंता (जलग्रहण) सुखलाल मीना ने अभियान के प्रतिवेदन के बारे में बताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में दस हजार रूपये अथवा इससे अधिक राशि, सामग्री अथवा मशीनरी का सहयोग करने वाले भामाशाहों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में डॉ. सत्य प्रकाश आचार्य, डीएफओ शलभ कुमार, पीएचइडी के अधीक्षण अभियंता दीपक बंसल, उद्योग विभाग के संयु€त निदेशक आर.के. सेठिया, उपनिदेशक आर्थिक एवं सांख्यिकी जी. के. माथुर, जनप्रतिनिधि मोहन सुराणा, पार्षद भगवती प्रसाद गौड़, के. के. शर्मा सहित विभिन्न उपखण्ड अधिकारी, विकास अधिकारी, सरपंच तथा ग्राम सेवक सहित भामाशाह मौजूद थे।