ऊँटनी का दूध पीने में शहरवासियों ने दिखाई रूचि

वरिष्ठ नागरिक भ्रमणपथ पर प्रारम्भ हुई ऊँटनी के दूध की बिक्री
ऊँटनी का दूध पीने में शहरवासियों ने दिखाई रूचि 1बीकानेर। भाकृअनुप-एनआरसीसी द्वारा बुधवार को वरिष्ठ नागरिक भ्रमण पथ पर ऊंटनी के दूध की बिक्री प्रारम्भ हुई। पहले दिन लगभग 1 घंटे चली इस प्रक्रिया में 52 पैकेट पास्तुरीकृत दूध की बिक्री हुई। इस दौरान लोगों में ऊँटनी का दूध पीने में खासा उत्साह देखा गया। ऊँटनी के दूध के बारे में आमजन में फैली निराधार धारणाओं के निराकरण हेतु केन्द्र द्वारा पेम्पलेट आदि का भी वितरण किया गया, जिसमें वैज्ञानिक आधार पर इसकी गुणवत्ता की पुष्टि की गई। आमजन सायं को ऊँटनी के पास्च्युरीकृत दूध के साथ-साथ इससे बनी आइसक्रीम का भी लुत्फ उठा सकेंगे। केन्द्र द्वारा आमजन की सुविधा के लिए पहल के रूप में प्रारम्भ की गई इस गतिविधि में केन्द्र निदेशक डॉ.एन.वी.पाटिल सहित केन्द्र के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी मौजूद थे।
केन्द्र निदेशक डॉ.एन.वी.पाटिल ने बताया कि ऊँटनी के दूध की गुणवत्ता, औषधीय महत्त्व तथा आमजन की मांग को देखते हुए एनआरसीसी द्वारा यह गतिविधि पुन: प्रारम्भ की गई है तथा केन्द्र ऐसी मंशा रखता है कि इससे प्रेरित होकर ऊँट पालक, किसान आदि इसे व्यवसाय के रूप में अपनाएंगे। डॉ.पाटिल ने ऊँटनी के दूध की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि न केवल एनआरसीसी बल्कि वैश्विक स्तर पर की गई शोध के परिणाम इस बात को पुख्ता करते हैं कि यह दूध ऑटिज्म, मधुमेह, टी.बी.,दमा, दूध की एलर्जी, उच्चर€तचाप, कैंसर, आदि के प्रबंधन में कारगर हैं। मानवीय रोगों में इसकी उपयोगिता को ध्यान रखते हुए यह आमजन को सुलभ करवाया जा रहा है। केन्द्र इच्छुक ऊँट पालकों, किसानों, उद्यमियों, संस्थाओं आदि को केन्द्र द्वारा विकसित ऊँटनी के दुग्ध उत्पाद के निर्माण संबंधी नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सदा तत्पर है, जिससे वे इसका विपणन कर अधिकाधिक लाभ अर्जित कर सकें। बुधवार से सुबह-शाम 6.30 बजे भ्रमणपथ पर प्रारम्भ हुई ऊँटनी के दूध की बिक्री आगामी 15 दिनों तक चलेगी, जो शहरवासियों के रूझान को देखते हुए आगे बढ़ाई जा सकती है।