प्रारंभिक बाल्यावस्था प्रशिक्षण का शुभारंभ : आंगनवाड़ी केंदों का नाम आंगनवाड़ी पाठशाला होगा, बच्चों को मिलगी शाला पूर्व शिक्षा

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-दिलीप सिंह बीदावत
प्रारंभिक बाल्यावस्था प्रशिक्षण का शुभारंभ : आंगनवाड़ी केंदों का नाम आंगनवाड़ी पाठशाला होगा, बच्चों को मिलगी शाला पूर्व शिक्षा 1बाड़मेर। जिले के पाटोदी ब्लॉक महिला एवं बाल विकास विभाग के दो सक्टरों के आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रारंभिक बाल्यावस्था का शिक्षण के तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आगाज सी. सै. स्कूल पाटोदी में सरपंच संतोषी जीनगर की अध्यक्षता हुआ। समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए हरफूल सिंह चौघरी विकास अधिकारी पाटोदी ने कहा कि शालापूर्व शिक्षा से ही बच्चों के विकास की नींव मजबूत होती है। यह महत्वपूर्ण कार्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है जोे सराहनीय है। इससे आगे चलकर यही बच्चे देश के अच्छे नागरिक बनेंगे तथा आपके प्रयास को सदैव याद रखेंगे।
प्रशिक्षण के शुभारंभ समारोह में आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गूंजन सोनी, उप निदेशक महिला एवं विकास, बाड़मेर ने बाल्यावस्था के सभी पांचोंआयामों पर अच्छे से समझ बनाकर आंगनवाड़ी केंद्रों पर यह शिक्षण कार्य कराएं जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के आगे आंगन वाड़ी पाठशाला नाम लिखवाना है। उन्होंने 30 मार्च राजस्थान स्थापना दिवस के अवसर पर नवीन प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षण सामग्री से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की जा रही है। इस दिन सभी अभिभावकों की आंगनवाड़ी केंद्रों पर बैठक का आयोजन कर उन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के सभी पांचों आयामों इससे जुड़ी शिक्षण सामग्री का प्रदर्शन कर बच्चों को आंगनवाड़ी पर भेजने के लिए प्रेरित करना है। विभाग द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक अमावश्या को आंगनवाड़ी केंद्रों पर अभिभावकों की बैठक का आयोजन किया जाएगा तथा उसमें बच्चों के विकास की प्रगति से अवगत कराया जाएगा। इससे आंगन वाडी केंद्रों पर अभिभावक आकर्षित होंगे तथा बच्चों को भेजना शुरू करेंगे। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कोई भी आंगवाड़ी निर्धारित समय पर नहीं खुलेगी तो उनके ख्लिाफ कार्यवाही होगी। आंगनवाड़ी केंद्रों की पहचान शालापूर्व शिक्षा केंद्र के रूप में होगी।
बाल विकास अधिकारी धर्मेंद्र करण ने बताया कि 30 मार्च को सभी कार्यकर्ताओं को आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के अभिभावकों की बैठक कर शालापूर्व शिक्षा के बारे में बताना है तथा बाल विकास के पांचों आयामों के बारे में जागरूक करना है। आगे से प्रति अमावश्या को अभिभावकों की बैठकों का आयोजन करना है। सभी कार्यकर्ताओं की यह शिकायत रहती है कि बच्चे नहीं आते। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेगी तो दौड़ कर आएंगे। ICDS Training 1
प्रशिक्षण के प्रथम दिन महिला एवं बाल विकास सुपरवाइजर मधु सांखला व कृष्णा मीना ने प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार तीनों पुस्तकों के विषय वस्तु एवं शिक्षण की विधाओं के बारे में बताया। तीन से चार साल तक के बच्चों की किलकारी वर्कबुक, चार साल से पंाच साल तक के बच्चों के लिए उमंग तथा पांच से छः साल तक बच्चों के लिए तरंग वर्क बुक, बाल्यावस्था के पांच आयाम क्रमशः शारीरिक विकास,भाषा विकास, रचनात्मक विकास, बोद्धिक विकास एवं सामाजिक विकास से संबंधित गतिविधियों का प्रेक्टिकल अभ्यास करावाया। आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी बड़े जोश के साथ प्रशिक्षण की गतिविधियों में भाग लिया। सरकारी विद्यालयों में नामांकन वृद्धि एवं बच्चों के शेक्षणिक स्तर को सुधारने के क्रम में महिला एवं बाल विकास द्वारा आंगनवड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा के रूप में पहचाने देने का यह अनूठा प्रयास आंगन वाड़ी केंद्रों को नई पहचान दे पाएगा तथा इससे बच्चों के कुपोषण कोे समाप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। समारोह में सी.सै.स्कूल के प्रिंसिपल वालाराम वर्मा, शिक्षक श्याम जी, निजी शिक्षण संस्थापक आइदान राम, भाखसर वार्डपंच चंपालाल धांधू, उन्नति विकास शिक्षण संगठन कार्यकर्ता दिलीप सिंह बीदावत व नींबाराम ने सहयोग प्रदान किया। प्रशिक्षण में पाटोदी सैक्टर की 68 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भाग ले रहीं है।

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