गोवा में रविन्द्र भवन के मंच पर साकार हुआ ‘मीरा‘ का जीवन सफर

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जयपुर। ‘मीरा‘ से ‘मीरा बाई‘ बनने के सफर पर केन्द्रित नाटक ‘मीरा‘ के मंचन के साथ गोवा के ‘वास्को द गामा‘ स्थित रविन्द्र भवन में चल रहे ‘युवा हिन्दी नाट्योत्सव‘ का आज समापन हुआ। प्रसिद्ध लेखक गुरचरण दास के प्ले पर आधारित इस नाटक का अनुवाद चिराग खंडेलवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर जवाहर कला केंद्र के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी), फुरकान खान के अलावा नाटक के निर्देशक, साहिल आहूजा भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 4-दिवसीय यह नाट्योत्सव जवाहर कला केंद्र द्वारा गोवा के कला एवं संस्कृति विभाग और रविन्द्र भवन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। इस नाट्योत्सव के दौरान राजस्थान के युवा नाट्य निर्देशकों द्वारा प्रस्तुत नाटकों – ‘द एनिमी ऑफ द पीपल‘, ‘मीरा‘ ‘कीर्तन‘ एवं ‘डाकघर‘ का मंचन किया गया। 

रविन्द्र भवन के मंच पर साकार हुआ ‘मीरा‘ बनने का सफर
Viral Hindi News, Rajasthan Hindi News, Rajasthan latest story, Latest india news, India hindi news, Rajasthan Health News, viral news, JKK in association , MEERA , RAVINDRA BHAWAN IN GOA , young directors of Rajasthan,Yuva Hindi Natyotsav,Vasco Da Gama in Goa , Meerabai,‘मीरा‘ नाटक में राजकुमारी मीरा के कृष्णभक्त ‘मीरा बाई‘ बनने के सफर को प्रभावशाली तरीके से चित्रित करते बताया गया कि मीरा किस प्रकार स्वयं को भक्ति के प्रतिरूप में स्थापित करती है। नाटक के आरम्भ में पांच लोग प्रेम के बारे में चर्चा करते हुए दिखाए जाते हैं। विभिन्न प्रसगों के माध्यम से नाटक में बताया गया कि  मीरा किस प्रकार कृष्ण भक्ति में लीन होती जाती है, उसकी ननद की ईर्ष्या, मीरा की हत्या के प्रयास और मीरा द्वारा पिया गया विष का प्याला किस प्रकार अमृत बन जाता है। कृष्ण भक्ति के लिए ‘मीरा‘ के घर छोड़ने पर उसके पति की मनोस्थिति भी नाटक के माध्यम से दर्शायी गई। नाटक को प्रभावी बनाने के लिए हिंदी एवं उर्दू भाषा का उपयोग किया गया। 

शुक्रवार शाम को नाटक ‘कीर्तन‘ का हुआ मंचन
शुक्रवार शाम को रविन्द्र भवन में नाटक ‘कीर्तन‘ का मंचन हुआ। इस अवसर पर जवाहर कला केंद्र के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी), फुरकान खान के अलावा नाटक की निर्देशक, अम्बिका कमल भी उपस्थित थी। वियोग, दुखद प्रेम और आकांक्षाओं पर आधारित यह नाटक एक महिला की कहानी पर केन्द्रित था।

यह एक डिवाइज्ड नाटक था जिसमें अभिनेता के शरीर को संवाद का जरिया बनाया गया। नाटक में एक महिला जो सड़कों पर रहती है और रूपये कमाने के लिए अपने पति कांतु एवं उसके मित्र बर्मू के साथ मिल कर सडकों पर तमाशा दिखाती है। नाटक में मोड आता है जब एक रात कमाई में हिस्सेदारी को लेकर कांतु की अपने मालिक से लडाई हो जाती है। इसके बाद कांतु गायब हो जाता है। पति के जाते ही इस महिला की जिंदगी अचानक बदल जाती है। 

उल्लेखनीय है कि सितम्बर 2018 में जेकेके द्वारा गठित थिएटर विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा युवा निर्देशकों का चयन किया गया था। प्रत्येक चयनित निर्देशक को नाटक तैयार करने हेतु जेकेके द्वारा एक लाख रुपये की ग्रांट दी गई थी। इन नाटकों का जेकेके में पहले ही मंचन हो चुका है और अब इनका मंचन गोवा में भी किया गया। 

 

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