माघ में सजी मोहन ब्रदर्स के सितार और सरोद की मानसून जुगलबंदी

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जयपुर। मैहर घराने के देश-दुनिया के मशहूर कलाकार लक्ष्य मोहन और आयुष मोहन, मोहन ब्रदर्स ने सितार और सरोद पर बारिश की बूंदों की ताल पर सुरों की रिमझिम पिरोकर शहर को नख-शिख भिगो संगीत प्रेमियों को खुशनुमा अहसास कराया। विद्यामंदिर क्लासेस की ओर से बिरला सभागार में संजोए मानसून जुगलबंदी क्लासिकल म्यूजिक कॉन्सर्ट में इन आला फनकार ने राग मल्हार का लावण्य छलकाया। सुर, लय और ताल में पिरोए खुशनुमा राग-रागनियों ने संगीत के दीवानों को रससिक्त कर दिया। इससे पहले आईआईटी जेईई एवं मेडिकल कोचिंग के नंबर 1 इंस्टीट्यूट विद्यामंदिर क्लासेस के अकेडमी डायरेक्टर जंम्यजय कुमार और वाइस प्रेसिडेंट बिजनस पंकज भार्गव ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया।

इन कलाकारों ने कार्यक्रम की शुरुआत तीन ताल में मियां की मल्हार में अपने चिर परिचित अंदाज में किया। वही राग देस मल्हार की प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद सभी संगीत प्रेमियों की दाद बटोरी। राजस्थानी संस्कृति का जाने माने गीत केसरिया बालम  को राग मिश्र मांड की प्रस्तुति में दिया। विद्यामंदिर की ओर से सितार और सरोद डुएट लाइव कंसर्ट के तहत संजोए क्लासिकल प्रोग्राम में युवा कलाकारो ने सुरों के खूबसूरत लगाव व ठहराव के उम्दा प्रदर्शन से अपने रियाज और गुरु के सबक को साकार किया। मानसून जुगलबंदी भारतीय शास्त्रीय संगीत के मानसून रागों के माध्यम से मनाया जाता है। जो विशेष रूप से वर्षा के समय साधा जाता है। मोहन ब्रदर्स बहुमुखी प्रतिभा के कारण सभी शैलियों के श्रोताओं के बीच एक खास पहचान बनाए हुए है। कार्यक्रम में पंडित रामकुमार मिश्रा के तबले और मृदंगम पर एन पद्मनाभन ने प्रभावी उनकी संगत दी। इस मौके पर विद्यामंदिर क्लासेस से जुड़े स्टूडेंट और उनके अभिभावक के साथ संगीत के गुणीजन मौजुद रहे।

मोहन ब्रदर्स की प्रस्तुति के दौरान ऐसा लगा मानो सितार और सरोद साज बज नहीं रहे अपितु गा रहे हैं। गौरतलब है कि राग मल्हार को सितार सरोद पर बजाना कठिन समझा जाता है।तकरीबन 10 साल से देश-विदेश में प्रस्तुति दे रहे कलाकारो ने जयपुर में पहली बार अपना कार्यक्रम पेश किया। वही कलाकारो ने विभिन्न प्रकार की प्रस्तुति में अपने कमाले फन और रियाज का खूबसूरत नजारा पेश किया। मीठी टोन क्वालिटी के इस फनकार ने तानों के मुश्किल पैटर्न को नजाकत और नफासत से पेश कर संगीत दीवानों की प्रशंसा बंटोरी।

पिछले दस सालों से क्लासिकल म्यूजिक में अपना योगदान और नई पहचान दिलाते आ रहे भारतीय संगीतकार लक्ष्य मोहन ने कहा कि ‘‘क्लासिकल म्यूजिक को लेकर लोगों को काफी गलत धारणा है। लोगों को क्लासिकल म्यूजिक से ठीक तरह से इंट्रोड्यूस नहीं किया गया है। लोगों को लगता है कि ये पुराना संगीत है जबकि ऐसा कुछ नहीं है।‘‘ वही आयुष मोहन ने बताया कि ‘‘इंडियन म्यूजिक को देश में हीं नहीं बल्कि विदेशों तक में काफी पसंद किया जाता है। क्लासिकल म्यूजिक हमेशा ही भारतीय संगीत की पहचान रहा है। सालों से बॉलीवुड फिल्मों में चार चांद क्लासिकल म्यूजिक लगाता रहा है, हालांकि जैसे-जैसे समय बदला वैसे-वैसे म्यूजिक इंडस्ट्री में भी काफी बदलाव आए लेकिन इसके बाद भी क्लासिकल म्यूजिक लोगों की पहली पसंद रहा है।‘‘

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