अफीम पॉलिसी पर दिल्ली में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री की उपस्थिति में बैठक सांसदों ने रखा किसानों का पक्ष

नई दिल्ली।  आगामी अफीम पॉलीसी को लेकर केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार की उपस्थिति में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में सांसदों ने कहा कि अधिकतम किसानों को लाभान्वित करने के लिये 10-10 आरी के पट्टे दिये जाये। आगामी अफीम पॉलिसी में लगभग 12,000 से 12,500 हैक्टेयर अफीम फसल का रकबा निर्धारित किया जाये तथा इसमें अधिकतम किसानों को लाभ देने के लिये न्यूनतम 10-10 आरी व अच्छी औसत देने वाले किसानों को प्रोत्साहन के लिये अधिकतम 15 आरी के अफीम पट्टे दिये जाये ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस खेती से पुनः जुड़ सकें। वर्तमान वर्ष (2015-16) में अफीम फसल हकवाने वाले किसानों को पुनः पट्टा दिया जाये। इस वर्ष अत्यधिक बारिश व प्राकृतिक बिमारियों के कारण फसल खराब हुई है, इसलिये इस वर्ष चीरा लगाने वाले व फसल देने वाले को भी किसी भी कारण से उनका पट्टा न काटते हुये उसे पुनः पट्टा जारी किया जाये। वर्तमान वर्ष (2015-16) में मौसमी बीमारियों के कारण फसल खराब हुई हैं। किसानों ने दवाईयों को अधिक प्रयोग किया जिसके कारण फसल का परिणाम मिलावटी दर्शाते हुये पट्टे काटे गये है वह भी पुनः दिये जाये।सांसदों ने कहा कि चुकिं गाढ़ता का नियम समाप्त कर दिया गया है इसलिये पुर्ववर्ती वर्षो में गाढ़ता के कारण कटे हुये पट्टे पुनः बहाल किये जाये। प्राकृतिक आपदा एवं ओलावृष्टि के समय कटे हुये पट्टों की औसत शुन्य मानकर उन्हें पुनः बहाल किया जाये। 1998 से 2003 तक में अफीम नीति में किसानों की अफीम तौल के पश्चात् एक केन में जाती थी परन्तु फैक्ट्री से जाँच में एक किसान मिलावट का दोषी हो जाता जो कि न्यायसंगत नहीं था, इसीलिये सरकार ने 2004 से 2009 के किसानों को इसमें छूट दी थी ऎसी छूट 1998 से 2003 तक के किसानों को भी मिले ताकि उनके पट्टे पुनः बहाल हो सके। पूर्व में 1985 की धारा 2 में मिलावट के पट्टों पर रियायत देते हुये जुर्माना लगाया जाता था, 2009 में ऎसा हुआ था इसी आधार पर 2009के बाद के पट्टे भी मिलावट के कारण वाले उन पर आर्थिक जुर्माना लगाते हुये पट्टे बहाल किये जाये। पूर्व में कटे हुये अफीम पट्टों में 3 वर्षो की औसत को आधार मानते हुये उन्हें पुनः बहाल किया जाये। सांसदों ने कहा कि नामान्तरण की प्रक्रिया सरल व पारदर्शी बनाई जाये, पारिवारिक कारणों से कटे पट्टे सहमति होने पर शीघ्र बहाल हो। अफीम पट्टा शुल्क जमा नहीं होने के कारण कटे हुये अफीम पट्टे बहाल किये जाये। दो या दो से अधिक बार अफीम फसल हंकवाने पर निरस्त किये गये अफीम पट्टे पुनः बहाल किये जाये। किसान अफीम पट्टा प्राप्त के पश्चात् किसी कारणवश अफीम की बुवाई नहीं कर पाया जिससे उसका पट्टा निरस्त किया गया हो ऎसे अफीम पट्टे पुनः बहाल किये जाये। किसान के खेत में दो या दो से अधिक राजस्व गाँवों की सीमा होने पर बुआई के दौरान उक्त जानकारी के अभाव में किसान द्वारा अपने स्वामित्व वाले अन्य राजस्व गाँव के खेत (जारी अफीम पट्टे में वर्णित गाँव के अतिरिक्त) में बुआई करने पर राजस्व सीमा विवाद के कारण कटे पट्टे बहाल किये जाये। अफीम पट्टा जारी करते समय किसान के नाम के साथ उसके पिताजी के नाम के बजाय उसके दादाजी का नाम पिताजी के रूप में लिखकर (विभागीय त्रुटी के कारण ) अफीम पट्टे जारी किये गये जिन्हेे कि बाद में निरस्त किया गया, उन अफीम पट्टों को बहाल किया जाये। सांसदों ने कहा कि अफीम पट्टा मिलने के पश्चात् किसी भी कारणवश बुवाई नहीं करने से कटे हुये पट्टे बहाल किये जाये। अफीम पट्टा वितरण के समय किसी भी कारणवश विभाग कार्यालय में समय पर उपस्थित नहीं होने के कारण कटे हुये पट्टे बहाल किये जाये। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुये अब तक ओलावृष्टि/वर्षा/गाढ़ता /औसत/घटिया/एवं अन्य किसी भी कारण से कटे हुये समस्त पट्टे बहाल किये जाये। अफीम फसल के लिये विशेष फसल बीमा योजना बनाई जाये। अफीम फसल बुवाई के एक माह में ही इसकी नपती (Measurment½ की जाये व पूरी फसल के दौरान केवल एक बार ही नपती (Measurment½ की जाये। अफीम की लागत ज्यादा होने के कारण अफीम का मूल्य बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति किलों एवं अधिक औसत वालों को 10,000 रुपये से 15,000 रुपये बढ़ाकर मूल्य दिया जाये। अफीम काश्तकार की मृत्यु के पश्चात् पारिवारिक सहमति के आधार पर गोदपुत्र रहे व्यक्ति को अफीम पट्टा जारी किया जाये। अफीम फसल का कच्चा तौल बन्द किया जाये।  NDPS एक्ट में बदलाव करते हुये संदेह के आधार पर गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों अथवा माननीय न्यायालय से दोषमुक्त किसानों को पुनः अफीम पट्टा दिया जाये एवं पट्टेधारी किसान के अतिरिक्त परिवार के किसी अन्य सदस्य के NDPS कानून में आरोपित होने पर किसान का पट्टा न काटा जाये। सांसदों ने कहा कि अफीम की जाँच काश्तकार के सामने ही की जाये ऎसा प्रयास किया जाये क्योंकि मार्च-अपै्रल में तौल के समय सेम्पलिंग होती है उसमें परिणाम अच्छा रहता है परन्तु 4 माह बाद फैक्ट्री में वही अफीम घटिया व मिलावटी बता दी जाती है। उसका कारण 3-4माह में अफीम की रासायनिक प्रक्रिया में परिवर्तन भी रहता है जिस कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पूर्व में लगभग 25-30 वर्ष पहले अफीम काश्तकारों को विभाग द्वारा निर्धारित मानदण्ड पुरा नहीं करने पर 3 वर्षो के लिये निलंबित किया जाता था, उसके पश्चात् उसका अफीम पट्टा पुनः बहाल कर दिया जाता था, यह नीति पुनः आरम्भ की जाये। चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में औद्योगिक बहुलता के कारण प्रदूषण फैलता। इसका परिणाम अफीम फसल पर भी पड़ता है इसीलिये इस क्षेत्र को विभाग के मापदण्डों में विशेश छूट दी जाये।बैठक से पहले पूर्व उप जिला प्रमुख मिठ्ठु लाल जाट, निम्बाहेडा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष बगदीराम धाकड़, कालुराम धाकड़, मोहन धाकड़, उंकार जाट, कैलाश जाट ने वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार को अफीम पॉलीसी में अधिक से अधिक छुट देकर ज्यादा से ज्यादा किसानो को पट्टे दिये जाने हेतु ज्ञापन दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह, चित्तौडगढ़ सांसद सी.पी. जोशी, भीलवाडा सांसद सुभाष बहेडिया, मंदसौर सांसद  सुधीर गुप्ता ने अफीम किसानो का पक्ष रखा। बैठक में एडीशनल सैकेट्री रेवेन्यु  बी.एन. शर्मा, नारकोटिक्स कमीशनर राजेश पुरी, नारकोटिक्स डायरेक्टर मनीष मणी तिवारी एवं विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।