हरिके बैराज के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने की मांग की

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उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की स्थाई समिति की 18वीं बैठक में अन्तर्राज्यीय मुद्दों पर चर्चा

जयपुर। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की स्थाई समिति की 18वीं बैठक जयपुर स्थित होटल में राजस्थान के मुख्य सचिव एनसी गोयल की अध्यक्षता में हुई।
बैठक के पहले सत्र में 12 मई, 2017 को चंडीगढ़ में 
हरिके बैराज के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने की मांग की 1उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की 28वीं बैठक की सिफारिशों की क्रियान्विति के संबंध में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इसके पश्चात् परिषद् से जुड़े प्रदेशों एवं विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों से संबंधित 29 मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कर स्थाई समिति ने अपनी सिफारिश की। इन सिफारिशों को आगामी दिनों में परिषद् की मुख्यमंत्री स्तरीय बैठक में निर्णय के लिए रखा जाएगा। इनमें जल वितरण, आधारभूत संरचना विकास, विद्युत आपूर्ति, प्रदूषण, वन एवं जल संरक्षण जैसे विषय प्रमुख थे।
बैठक में इंदिरा गांधी फीडर से राजस्थान को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने एवं मात्रा बढ़ाने पर चर्चा हुई। पंजाब के लुधियाना, जालंधर एवं फगवाड़ा से मिलने वाले दूषित पदार्थों को रोकने के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मॉनिटरिंग करने के लिए आश्वस्त किया। साथ ही पंजाब सरकार ने सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने सहित विभिन्न कदम उठाने पर सहमति जताई। राजस्थान ने इंदिरा गांधी फीडर की क्षमता के मुताबिक हरिके बैराज के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने की मांग की। इस रेगुलेटर की क्षमता 15 हजार क्यूसेक है जबकि फीडर की 18 हजार 500 क्यूसेक है। इसलिए बरसात के दिनों में सरप्लस पानी बहकर पाकिस्तान चला जाता है। रेगुलेटर की क्षमता बढ़ने पर साढ़े तीन हजार क्यूसेक पानी का सदुपयोग हो सकेगा। इससे पानी की कमी का सामना कर रहे प्रदेश को काफी राहत मिलेगी। भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में राजस्थान को सदस्य बनाने की भी मांग उठाई गई। राजस्थान के हित से जुड़े इन बिन्दुओं को आगामी मुख्यमंत्रियों की बैठक में रखा जाएगा।
वन भूमि पर जनहित से जुड़े विकास कार्य करवाने के लिए एक से पांच हैक्टेयर तक अनुमति देने की शक्ति राज्य सरकारों को देने की मांग की गई जिस पर सभी ने सहमति जताई। वर्तमान में इसके लिए केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों से अनुमति लेनी पड़ती है जिसमें काफी समय नष्ट होता है जिससे कार्यों की लागत भी बढ़ जाती है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान के मुख्य सचिव एनसी गोयल ने कहा कि बैठक में सहकारी संघवाद की भावना के आधार पर राज्यों के आपसी हित के मुद्दों एवं केन्द्र से जुड़े विभिन्न बिन्दुओं के समाधान के लिए चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे सुलझने से परिषद् से जुड़े राज्यों में विकास की गति बढ़ाने, लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने एवं समाज के हर तबके की विकास में समान भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस परिषद् में राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ शासित प्रदेश चंडीगढ़ शामिल है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव विनीत चौधरी, हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस धेसी, अन्तर्राज्य परिषद् सचिवालय के विशिष्ट सचिव आर बुहरिल, विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव (जस्टिस) डॉ. आलोक श्रीवास्तव सहित संबंधित राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेश एवं केन्द्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद थे।