कला में भावनाएं उत्पन्न करने की शक्तिः प्रो वीरबाला भवसर

????????????????????????????????????जयपुर। कला एक ऐसी शिक्षा है जो समाज में व्याप्त प्रत्येक बुराई को खत्म कर सकती है। यंत्रों के ज़रिए हमें दुनिया के कोने-कोने की खबर तो मिल जाती है परन्तु वो हमारे अंदर की भावनाओं को जागृत करने में असफल होते हैं तत्पश्चात् कला ही एकमात्र ज़रिया बाकी रहता हैं इमोशन्स पैदा करने का। प्रो वीरबाला भवसर ने द आई आई एस युनिवर्सिटी के विज़ुअल आर्ट्स विभाग की ओर से गुरूवार से आयोजित नेशनल पेंटिंग कैम्प 2016 रंगरीत के उद्घाटन समारोह में श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए यह विचार रखे।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अशोक गुप्ता ने कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में उपस्थित कलाकारों एवं मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विज़ुअल आर्ट्स विभाग की ओर से हमेशा से ही कला के बेहतरीन नमूने देखने को मिलते रहते हैं। परन्तु यह मौका इसलिए खास है क्योंकि इस अवसर पर देश के कोने-कोने से कलाकार यहां आकर अपनी कलाकृतियां बनाएंगे एवं छात्राओं के साथ अपनी कला को साझा करेंगे। इसी के साथ ही डॉ गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय की पूरी कोशिश रहेगी कि हर वर्ष इस कैम्प का आयोजन किया जा सके।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद प्रो वीरबाला भवसर ने कहा कि वो तकनीकी एवं विज्ञान को कला नहीं मानतीं क्योंकि वो बौद्धिकी है वहीं कला सूक्ष्म है। इन्होंने आगे कहा कि हर एक व्यक्ति अपने आप में कलाकार है बस ज़रूरत है तो उसे पहचानने की एवं कला की तकनीक सिखाई जा सकती है परन्तु अभिव्यक्ति नहीं सिखाई जा सकती यह स्वयं ही आती है।

उद्घाटन समारोह के अंत में प्रो भवसर ने प्रकृति के सौंदर्य को दर्शाते हुए एक पेंटिंग बनाई जिसके ज़रिए उन्होंने हरियाली एवं प्रकृति की खूबसूरती के बीच एक झोपड़ी को दर्शाया जो यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि प्रकृति एवं पुरानी चीज़ों से हमेशा प्यार करें।

कोटा से आए कलाकार डॉ राकेकला में भावनाएं उत्पन्न करने की शक्तिः प्रो वीरबाला भवसर 1श सिंह एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग के ज़रिए इस अवसर पर मानवीय जीवन के उन पक्षों को उजागर करने की कोशिश कर रहें हैं जिन्हें देखा एवं महसूस तो किया जा सकता है परन्तु उनकी गहराई तक नहीं पहुंचा जा सकता। डॉ राकेश के अनुसार वो अपनी पेंटिंग के ज़रिए मानवीय जीवन के अनभिज्ञ पहलु जैसे कि उतार-चढ़ाव, संघर्ष, प्रेम, करूणा को तो दर्शाएगें ही साथ ही मानव का मानव, प्रकृति, ईश्वर एवं आत्मा से रिश्ते का भी गहराई से चित्रण करेंगे।

इस सात दिवसीय कैम्प में लगभग 20 कलाकार भाग ले रहे हैं जो अपनी-अपनी कला जैसे कि एब्स्ट्रैक्ट, ट्रेडिशनल, वॉश, एक्रेलिक आदि में माहिर हैं। इनमें शामिल हैं अजमेर से अनुपम भटनागर, कुरूक्षेत्र से राम विरंजन, वाराणसी से सुनील विश्वकर्मा, लखनऊ से अवधेष मिश्रा, नाथद्वारा से मीना बया आदि। यह कलाकार इस कैम्प के ज़रिए अपनी भावनाओं आदि को कैन्वस पर उकेरेंगे एवं अन्य कलाकारों तथा छात्राओं के साथ साझा करेंगे।