ब्रिटेन में कैद आतंकी जेल का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए कर रहे

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लंदन, 2 अगस्त (आईएएनएस)। ब्रिटेन में एक ताजा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जेल में बंद आतंकवादी, जेलों में अपनी कैद के समय का इस्तेमाल अधिक कट्टरपंथी बनने और दूसरों पर हमलों की तैयारी करने के एक अवसर के रूप में कर सकते हैं।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रेडिकलाइजेशन (आईसीएसआर) के एक शोध से पता चला है कि 2016 के बाद से ब्रिटेन में जेल में बंद या रिहा हुए कैदियों द्वारा कम से कम पांच आतंकवादी हमले किए गए या करवाए गए।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जिहादी जेलों को संघर्ष और टकराव के एक थिएटर में बदल रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चरमपंथियों के बीच एक उभरता हुआ विचार यह है कि जेल न केवल भर्ती या नेटवर्क बनाने लिए एक अवसर है बल्कि खुद को भी और अधिक चरमपंथी विचारों से लैस करने का अवसर देती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकियों को भर्ती करने के आरोप में कैद किए गए रिक्रूटर्स मनोविज्ञान का अध्ययन बेहतर रिक्रूटर बनने के लिए करते हैं। कैद किए गए विचारक इस्लामी और जिहादी इतिहास को और बेहतर विचारक बनने के लिए सीखते हैं।

इसमें कहा गया है कि ऐसे कैदी जेल को युद्ध के मैदान में आईएसआईएस के नुकसान और जिहादी परिदृश्य में व्यापक उथल-पुथल से उबरने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की परीक्षा के रूप में देखते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि जिहादियों ने जेलों का उपयोग यह समझने के लिए भी किया है कि अधिकारी काम कैसे करते हैं। वे जल्द रिहा होने के लिए खुद का व्यवहार जेल में अच्छा रखते हैं।

शोधकर्ताओं फिशमोंगर्स हॉल पर हमला करने वाले उस्मान खान की मिसााल दी है।

पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक खान ने सरकार के पुनर्वास और चरमपंथ से दूर होने की योजनाओं में भाग लिया था। उसे सरकार की इन योजनाओं की सफलता के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा था, जब तक कि उसने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लर्निग टुगेदर स्कीम के एक कार्यक्रम पर हमला नहीं कर दिया।

उसे 2012 में कश्मीर में एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने की योजना के लिए जेल में डाल दिया गया था। अपील पर उसकी सजा कम कर दी गई थी और दिसंबर 2018 में वह मुक्त कर दिया गया था।

खान ने जेल में लिखा कि उसकी पिछली मान्यताएं इस्लाम की गलत व्याख्या के कारण थीं और वह अब एक नए रास्ते पर है और अब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

आईसीएसआर की ब्रिटेन समेत यूरोप के दस देशों को कवर करने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि खान ने हो सकता है कि सिस्टम के साथ खेल खेला हो। रिपोर्ट में सरकार से कहा गया है कि वह जोखिम-मूल्यांकन तरीकों और चरमपंथरोधी कार्यक्रमों की समीक्षा करे।

ब्रिटिश न्याय मंत्रालय ने कहा कि इस दावे का कोई आधार नहीं है कि चरमपंथी ब्रिटेन की जेलों को एक अवसर के रूप में देखते हैं। मंत्रालय ने कहा कि शोधार्थियों की ब्रिटेन में कैदियों तक सीधी पहुंच नहीं होने के कारण यह बातें निराधार हैं।

ब्रिटिश संसद के सदन हाउस आफ कॉमन्स ने हाल में आतंकियों की सजा अवधि बढ़ाने वाले कानूनों को मंजूरी दी है।

मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, हमने चरमपंथियों को जहरीली विचारधारा को सलाखों के पीछे से फैलाने से रोकने के लिए दुनिया भर में अग्रणी कदम उठाए हैं। हमारे नए कानून का मतलब है कि अब उन्हें सख्त सजा और रिहाई पर निगरानी का सामना करना पड़ेगा जिसमें व्यवहार की जांच करने के लिए पॉलीग्राफ परीक्षण भी शामिल है।

–आईएएनएस