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लॉकडाउन के बाद तेज होगा काम, भारत को बनाएंगे दुनिया की कौशल राजधानी : डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय (इंटरव्यू)

लॉकडाउन के बाद तेज होगा काम, भारत को बनाएंगे दुनिया की कौशल राजधानी : डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय (इंटरव्यू)

नई दिल्ली, 30 अप्रैल(आईएएनएस)। देश में कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्किल इंडिया प्रोग्राम बड़ा संकटमोचक साबित हुआ है। वर्ष 2015 में शुरू हुई इस स्कीम के तहत युवाओं को दी गई ट्रेनिंग का ही नतीजा है कि जब जरूरत पड़ी तो देश भर के आईटीआई (इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) ने युद्धस्तर पर काम करते हुए 20 लाख से ज्यादा मास्क और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट(पीपीई) तैयार कर डाले।

केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय का कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय इन दिनों लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकारों के लिए भी खासा मददगार साबित हो रहा है। मंत्रालय ने देश भर मे मौजूद 15 हजार से ज्यादा प्रशिक्षण संस्थानों को आईसोलेशन वार्ड में बदलने का राज्यों को प्रस्ताव दिया है।

डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने गुरुवार को आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बताया कि युवाओं को रोजगार के लिए तरह-तरह की ट्रेनिंग देकर देश को कौशल राजधानी(स्किल कैपिटल) बनाने का मोदी सरकार का लक्ष्य है। लॉकडाउन के बाद इस दिशा में काम तेज होगा। लॉकडाउन में हुए हर नुकसान की भरपाई करने की लिए योजना बनाने में मंत्रालय जुटा हुआ है। यूपी के चंदौली से सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. पांडेय के इंटरव्यू के पेश हैं प्रमुख अंश।

सवाल- आप देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय को संभाल रहे हैं। क्योंकि स्किल इंडिया की कमान कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के कंधों पर ही है। कोराना के खिलाफ लड़ाई में आपका मंत्रालय किस तरह से योगदान कर रहा है?

जवाब- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार स्किल इंडिया निरंतर कार्य कर रहा है। हमारे कई स्किल पार्टनर हैं जो आपदा की इस मुश्किल घड़ी में जनकल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। वैश्विक महामारी को रोकने के लिए स्किल इंडिया से जुड़े छात्र अपने इनोवेटिव आइडिया एवं अनुसंधान के माध्यम से अपना शत प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। कुछ उदाहरण देना चाहूंगा।

एनएसआईटी मुंबई ने कोविड 19 को फैलने से रोकने के लिए एक हाथ धोने की मशीन बनाकर मुंबई के पुलिस थाने में स्थापित की है, जहां व्यक्ति को हाथ धोने के लिए साबुन की बोतल या नल को नहीं छूना पड़ेगा। इसी तरह आईटीआई बेरहमपुर(ओडिशा) ने एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसरों के साथ मिलकर एक एरोसोल बॉक्स डिजाइन किया जो रोगी के चेहरे, मुंह और नाक को कसकर ढंक देता है और उसे संक्रमित होने से बचाता है। आईटीआई कटक के प्रतिभावशाली छात्रों ने एक विशेष तरह का रोबोट बनाया है जिससे स्वास्थयकर्मियों को मरीजों की देखभाल करने में आसानी होगी। बिहार के जहानाबाद के सरकारी अस्पताल के लिए आईटीआई ने सेनिटाइज करने वाली एक सार्वजनिक सुरंग बनाई है।

सवाल- राज्यों में आईसोलेशन वार्ड की दिक्कतें दूर करने के लिए भी आपका मंत्रालय आगे आया है? क्या है पूरा मामला?

जवाब- देखिए, हमारे पास 15 हजार आईटीआई और 33 नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट हैं। इन संस्थानों में भवन आदि की सारी बेहतर सुविधाएं हैं। हमारे मंत्रालय ने इन सभी केंद्रों को आइसोलेशन वार्ड में बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को प्रस्ताव दिया है। कई संस्थानों को प्रवासी मजदूरों और अन्य जरूरतमंदो के लिए आश्रय घरों में तब्दील किया भी गया है। ताकि राज्यों को आइसोलेशन वार्ड बनाने में भवनों की कमी न झेलनी पड़े।

इतना ही नहीं, हमारे आईटीआई और जनशिक्षण संस्थानों ने 20 लाख से अधिक मास्क बनाकर जरूरतमंदों को बांटे हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई किट का भी निर्माण किया है। देश भर के अलग अलग राज्यों में आईटीआई, जेएसएस जैसे अनेक स्किल संस्थानों ने इस मुश्किल घड़ी में पहल कर अपनी सार्थकता सिद्ध की है। मैं और मेरा मंत्रालय जनकल्याण के लिए हमेशा तत्पर हैं और रहेंगे। सभी ने मिल कर पीएम केयर फंड में में भी अपना योगदान दिया है।

सवाल- देश में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम(एनएपीएस) की क्या प्रगति रिपोर्ट है। इससे कितनों को लाभ मिला? कितने नियोक्ताओं या प्रतिष्ठानों को वित्तीय सहायता दी गई।

जवाब- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2016 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक संख्या में प्रशिक्षुता को बढ़ावा दिया जाना है। युवाओं के कौशल विकास का जो लक्ष्य हमने रखा था, उस कसौटी पर हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और जल्द ही इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे। अप्रेंटिसशिप में एक प्रशिक्षु को दिए जाने वाले कुल स्टाइपेंड का 25 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार द्वारा सीधे नियोक्ताओं को दिया जा रहा है। हमने न्यूनतम स्टाइपेंड को 5,000 रुपये से 9,000 रुपये तक मासिक कर दिया है। हम बाजार के अनुरूप..वर्तमान की मांग और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लगातार कार्य कर रहे हैं।

अप्रेंटिसशिप के द्वारा नौकरी के लिए कुशल और योग्य कर्मचारियों को तैयार किया जा रहा है। भारत को दुनिया की कौशल राजधानी के रूप में विकसित करना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। यह मॉडल कोरोना महामारी के बाद हमारी इकॉनमी को सपोर्ट करने में अच्छे परिणाम लाएगा। मुझे उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां इस अधनियम का पालन करेंगी, जिससे उनको ही नहीं, अभ्यर्थियों को भी लाभ होगा। जो सेक्टर आने वाले दिनों में थोड़ी धीमी गति से बढ़ेंगे उनमे अप्रेंटिसशिप का यह मॉडल काफी सफल साबित होगा।

सवाल- कोरोना वायरस के कारण दुनिया के हर देशों की तरह भारत में भी अर्थव्यवस्था और रोजगार पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में इस महामारी के दौर में आपका मंत्रालय कैसे स्किल इंडिया की दिशा में काम कर रहा है? क्योंकि देश में 65 प्रतिशत युवा हैं। इनके हुनर को निखारकर रोजगार लायक बनाने की जिम्मेदारी आपके मंत्रालय की है।

जवाब- आपको जानकारी होगी कि स्किल इंडिया से जुड़े हुए अनेक सार्वजनिक उपक्रम कोरोना से लड़ने के लिए नए उत्पादों के निर्माण में बहुत ही इनोवेटिव तरीके से स्थानीय प्रशासन को सहायता दे रहे हैं। ऐसे इनोवेशन न सिर्फ स्वास्थ्य कर्मियों को सहायता प्रदान करने का एक अच्छा उदाहरण हैं बल्कि देश के युवाओं को खुद के भीतर उद्यमशीलता की भावना जागृत करने के साथ ही अनुसंधान के क्षेत्र में आगे जाने के लिए बहुत प्रेरित करने वाले हैं।

हमारा मंत्रालय लॉकडाउन समाप्त होने के बाद फिर से काम शुरू करने के लिए जरूरी योजना तैयार करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हम जो भी समय लॉकडाउन के कारण व्यर्थ हुआ है उसकी भरपाई करने की पूरी कोशिश करेंगे। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हम हर युवा को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पूरा प्रयास करेंगे। इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से हमें यह अच्छी तरह से ज्ञात हो चुका है कि हमें पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना ही होगा। और इसी के अनुसार मैं और मेरा मंत्रालय पूरी तरह से तैयार हैं।

सवाल-देश में कोरोना के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही लड़ाई को आप किस रूप में देखते हैं? केंद्र सरकार के प्रयास कितने सफल हैं?

जवाब- देखिए, आपदा की इस मुश्किल घड़ी में पूरा देश एकजुट होकर वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, हर कोई अपना-अपना योगदान दे रहा है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हमें यह सफलता, केंद्र और राज्यों सरकारों में बीच साझेदारी, कॉपोर्रेट जगत के साथ सफल कोऑपरेशन, और जनता की समझदारी एवं प्रशासन के नियमों का पालन करने की वजह से प्राप्त हो रही है।

हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि जान भी, जहान भी। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने कमजोर वर्गों के लोगों के लिए स्पेशल पैकेज का एलान किया, कोरोना वॉरियर्स एवं लोगों को कोई समस्य ना हो इसको लेकर केंद्र सरकार ने केंद्रीय एवं राज्य के स्तर ऊपर हेल्पलाइन शुरू की है, और हर प्रकार से सावधानियों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं ताकि हर कोई अपने सुझाव एवं संदेश सीधे सरकार तक भेज सकें और स्वयं को सुरक्षित रख सके।

इस मुश्किल घड़ी में नागरिकों के हितों को ध्यान मे रखते हुए केंद्र सरकार उज्जवला योजना के तहत तीन महीने तक मुफ्त सिलेंडर दे रही है। डॉक्टर और नर्स सहित स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा दी गई, फंसे हुए श्रमिकों को वापस अपने गृह राज्य में जाने की भी सुविधा दी जा रही। हर तरह की मेडिकल सर्विस और दवाएं पर्याप्त मात्रा में मुहैया करवाई जा रही हैं। डेली वेज वाले श्रमिकों के लिए खाने पानी के संस्धानों पे खासा ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे अनेक कार्य एवं योजनाएं हैं जो लोगों के हित में है और यह सब मोदीजी के सफल नेतृत्व की वजह से ही संभव हो पाया है। मुझे पूरी उम्मीद है हम जल्द ही इस वैश्विक महामारी से भारत निजात पायेगा और एक स्वस्थ एवं सफल देश का निर्माण होगा।

--आईएएनएस

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