Thursday, July 9, 2020

चीन-भारत रिश्तों के लिए क्या जरूरी है?

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Vishal Rohiwal
Vishal Rohiwal
विशाल रोहिवाल पिछले दस वर्ष से कंटेट राईटिंग व स्वतंत्र पत्रकार के रुप में काम कर रहें है। वर्तमान में हैलो राजस्थान की वेब टीम में सीनियर कंटेंट एडिटर के रुप में अपनी सेवांए दे रहें है।
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बीजिंग, 30 जून (आईएएनएस)। इन दिनों चीन और भारत के रिश्तों में इतनी खटास पैदा हो गई है कि अब भारत सरकार की तरफ से 59 चीनी ऐप पर बैन लगा दिया गया है। जिनको बैन किया गया है, उनमें टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, वीचैट, शेयरइट और कैम स्केनर समेत अन्य शामिल हैं।

दरअसल, 15 जून की रात को पूर्वी लद्दाख पर गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई और उसी के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। कई लोग तो इसकी तुलना डोकलाम में 2017 में हुए विवाद से कर रहे हैं, जहां चीन और भारत की सेना 73 दिनों तक आमने-सामने खड़ी थी। तब दोनों बड़े एशियाई देशों ने सूझबूझ और समझदारी का परिचय देते हुए इस टकराव और तनातनी को खत्म कर दिया।

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हालांकि, इस बार भी चीन और भारत बातचीत के रास्ते से दोनों देशों के बीच बने तनाव को कम करने की कोशिश में हैं। दोनों पक्षों की ओर से कोर कमांडर स्तर की बातचीत भी हो रही है। वैसे भी दोनों देशों की सेनाओं की सीमा पर मोर्चेबंदी के बीच बातचीत के जरिये गतिरोध का हल निकालने के लिहाज से सैन्य स्तर की इस वार्ता को अहम समझा जा रहा है।

देखें तो डोकलाम विवाद को पीछे छोड़ साल 2018 के अप्रैल में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वुहान में दो दिवसीय अनौपचारिक बैठक की, जिसने भारत-चीन संबंधों को एक नई ऊर्जा से भर दिया। इस अनौपचारिक वार्ता को दिल से दिल को जोड़ने वाली पहल करार दिया गया। उसके बाद साल 2019 में जब राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारत के दौरे पर आये थे तब प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनका स्वागत दक्षिण भारतीय परंपराओं के तहत किया था, और उनके साथ अनौपचारिक मुलाकात की।

दरअसल, इन मुलाकातों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विवादास्पद मुद्दों पर सहमति की राह खोजना था, क्योंकि दोनों देश जानते हैं कि सहयोग और समन्वय के जरिए ही विकास पथ पर आगे बढ़ा जा सकता है और बातचीत ही एक माध्यम है जिससे सीमा-विवाद को सुलझाया जा सकता है। पिछले 40 सालों से चीन और भारत दोनों ने कोशिश की है कि सीमा पर शांति और स्थिरता कायम रह सके।

यह हम सब जानते हैं कि चीन और भारत की गिनती दुनिया के सभ्य देशों में होती हैं। अतीत के एक लंबे इतिहास में इन दोनों देशों की जनता के बीच आवाजाही रही है और एक दूसरे से बहुत कुछ सीखा गया है। दोनों देशों ने न सिर्फ विश्व संस्कृति में अपना-अपना योगदान दिया है, बल्कि एक दूसरे के साथ सांस्कृतिक विकास में भी बड़ी भूमिका अदा की है। अगर चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान न होता, तो दोनों देशों का सांस्कृतिक विकास आज जैसा बिल्कुल नहीं होता। चीन और भारत का सांस्कृतिक संबंध इतना घनिष्ठ और गहरा है कि दुनिया में ऐसा और कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।

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जाहिर है, सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के मनमुटाव को मिटाने और लोगों की आपसी समझ को बढ़ाने के लिए मददगार है। आज के समय में दोनों देश विश्व शांति के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। दुनिया की 40 फीसद आबादी इन्हीं दो देशों में रहती है। अगर दोनों देश साथ मिलकर चलें तो पूरी दुनिया इन दोनों देशों का अनुसरण करेगी। इसके लिए जरूरी है कि दोनों देश एक दूसरे के हितों को समझें और उनका सम्मान करें। एकदूसरे के साथ सहयोग करना ही दोनों देशों के सुधरते रिश्तों की बुनियाद है।

मैं समझता हूं कि भारत के नये भारत और चीन के नये युग की कोशिश दुनिया के हित में है, क्योंकि चीन और भारत पिछले 2000 सालों में से 1600 सालों से वैश्विक आर्थिक विकास में इंजन की तरह काम कर रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और चीन दोनों की सामाजिक प्रणाली अलग-अलग है, फिर भी दोनों प्राचीन पूर्वी देश हैं। दुनिया के दो सबसे बड़े विकासमान देशों के विकास को लेकर पूरी दुनिया आशावान है। साथ ही उन्हें दुनिया के बड़े देशों और पश्चिमी दुनिया के सामरिक बाधाओं का सामना भी करना पड़ता है।

बहरहाल, 21वीं सदी एशिया की सदी है। एशिया के अनेक देश तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के तेज विकास के साथ-साथ संस्कृति भी बहुत ज्यादा समृद्ध हो रही है। इससे एशिया के अनेक देशों के राजनीतिक, आर्थिक विकास को बल मिलेगा। चीन और भारत इस विकास में मुख्य भागीदार बनकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं और एशिया के अनेक देशों के राजनीतिक और आर्थिक विकास की प्रेरक शक्ति बन सकते हैं। इस विकास के रूझान को दुनिया के समस्त लोग समझने लगे हैं। ऐसी स्थिति में अपने-अपने देश का अच्छी तरह निर्माण करने के लिए एक-दूसरे से सीखना और अधिक जरूरी है।

आज चीन और भारत के बीच सहयोग और आदान-प्रदान को बढ़ाने और दोनों देशों की परंपरागत मैत्री को और अधिक विकसित करने के लिए एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे के हितों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। टकराव की स्थिति में कोई देश विकास नहीं कर सकता, वैसे भी चीन और भारत का रिश्ता और भाग्य एक दूसरे से जुड़ा है। उसको इतना खराब नहीं होने देना चाहिए, अगर ठीक करने का समय आये तो ठीक न कर सके। समझना होगा कि चीन और भारत के विकास का भविष्य उज्‍जवल है, बस एक दूसरे के हितों का ध्यान रखना अपरिहार्य है।

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(लेखक : , चाइना मीडिया ग्रुप में संवाददाता हैं)

( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )

— आईएएनएस

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