हर गरीब-वंचित सहित सभी को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी – राष्ट्रपति

President Ramnath Kovind judicial process has gone beyond the reach of the common man

राजस्थान हाईकोर्ट के नवीन भवन का उद्घाटन

जोधपुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने कहा कि हर गरीब-वंचित सहित सभी को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। निःशुल्क कानूनी सहायता के साथ न्यायाधीशों और वकीलों का सामूहिक सहयोग इसमें प्रभावी सिद्ध होगा। इसे देश के संविधान की प्रस्तावना में रेखांकित किया गया है जिसे हमें साकार करना है। श्री कोविंद जोधपुर में (Jodhpur-Jaipur National Highway) जोधपुर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर झालामंड में राजस्थान हाईकोर्ट Rajasthan High court) के नवीन भवन का उद्घाटन कर समारोह को संबोधित कर रहे थे।

President Ramnath Kovind judicial process has gone beyond the reach of the common man


राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि देश के संविधान में भी न्यायपालिका को ही संवैधानिक सत्य के निर्धारण की गंभीर जिम्मेदारी सौेंपी है। संविधान ने न्यायपालिका को अपने सर्वोच्च व्याख्याकार और संरक्षण की भूमिका दी है। संविधान में एक ऎसी न्यायपालिका की परिकल्पना की गई है जो यह सुनिश्चित करती है कि सत्य की हमेशा विजय तथा असत्य की पराजय हो। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी के लिए न्याय सुलभ करवाने का है। प्रत्येक गरीब एवं वंचित वर्ग का व्यक्ति भी न्याय प्राप्त कर सकें, ऎसी व्यवस्था होनी चाहिए। संविधान की प्रस्तावना के अनुसार सभी को न्याय सुलभ करवाने का दायित्व न्यायपालिका ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के लिए दरिद्रनारायण का कल्याण सर्वोपरि था। उनके विचारों का अनुसरण करते हुए प्रत्येक नागरिक को न्याय सुलभ करवाने पर जोर देना होगा। कई कारणों से न्याय प्रक्रिया खर्चीली हुई है। इस संबंध में गांधीजी की कसौटी जो गरीब और कमजोर व्यक्ति का चेहरा याद रखने के सही राह नजर आती है, पर ध्यान देना चाहिए। निःशुल्क कानूनी सहायता इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्य में बैंच और बार के सदस्यों का सामूहिक प्रयास ही प्रभावी सिद्ध हो सकता है।

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राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान में असमानता दूर करने तथा सामाजिक परिवर्तन लाने में तकनीक का विशेष योगदान है। इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर नौ भाषाओं में निर्णयों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करवाकर आगे बढना आरंभ किया है। अन्य न्यायालयों को भी स्थानीय भाषा में अपने निर्णय उपलब्ध करवाने चाहिए।


राष्ट्रपति ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने भारतीय न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया है। कई विधिवेता और न्यायविद इसकी देन है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार से विधि विशेषज्ञ राष्ट्र को प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नवीन भवन 288 स्तम्भों पर टिका है। यह न्याय का मंदिर है। न्याय की नींव सत्य पर टिकी हुई है। सत्य न्याय प्रणाली की आधारशीला है। इस भवन का अद्भुत वास्तुशिल्प इसे राजस्थान के प्रसिद्ध इमारतों में शामिल करेगा। यह हम सभी के लिए धरोहर होगी।


राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि वह इस न्याय के मन्दिर को जनता को समर्पित करने के उद्घाटन समारोह में शामिल होकर गौरवान्वित महसूस कर रहै हैं। यह भवन अन्याय को पहचानने और अधिकारों के दुरूपयोग को रोकने के लिए ज्ञान, साहस और संयम के माध्यम से पीड़ितों को लाभान्वित करेगा। उन्होंने कहा कि एक समिति की सिफारिश पर 1949 में राज्य का उच्च न्यायालय जोधपुर में स्थापित किया गया था, तब से इसकी मुख्य पीठ 1935 में बनी प्राचीन इमारत में काम कर रही थी। बढ़े हुए न्यायिक कार्यों की समकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह नवीन भवन बनाया गया है। उन्होंने नए भवन की शानदार विशेषताओं को रेखांकित किया।   

राज्यपाल ने कहा कि तथ्यों के आधार पर ही न्याय की आधारशीला टिकी हुई है। इसलिए भविष्य में समय पर न्याय देने और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए कानूनी प्रक्रिया में शीघ्र परीक्षण के अभिनव तरीकों को शामिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में शताब्दियों पहले से न्याय की सुखद परम्परा रही है। इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए देश के संप्रभु गणराज्य को न्याय दिलाने, सामान्य सुरक्षा प्रदान करने, व्यक्तिगत अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ मानव सम्मान सुनिश्चित करने का कार्य न्यायपालिका को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों की आशा और उम्मीदों को न्यायपालिका देखती है। लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास है। इसलिए लोगों में जागरूकता लाने और कानून प्रणाली के कामकाज को मजबूत करने के लिए न्याय व्यवस्था सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े ने कहा कि संविधान की मूल भावना के मुताबिक देश के हर नागरिक की न्याय तक पहुंच होनी चाहिए। इसके लिए कई सारी व्यवस्थाओं के साथ आधारभूत ढांचे को भी मजबूत करना जरूरी है। राजस्थान हाईकोर्ट का नवीन भवन निर्माण इसी दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने बार व बैंच को बधाई देते हुए कहा कि इस भवन के निर्माण से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति इस महत्वपूर्ण कार्य का श्रेय लेने का हकदार है। उन्होंने कहा कि हमें लोगों को समय पर न्याय मुहैया कराने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे। 

श्री बोबड़े ने कहा कि आपराधिक मामलों में न्याय के संबंध में नए सिरे से चर्चा शुरू हो रही है। उन्होंने कहा कि ऎसे मामलों में न्याय होने में समय लगता है। उन्होंने कहा कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में नहीं हो सकता है। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि बदले की भावना रखकर भी कभी न्याय नहीं किया जा सकता है। श्री बोबड़े ने कहा कि न्यायिक मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ-साथ उनकी संख्या घटाने के भी प्रयास करने चाहिए। इसके लिए हमें याचिका से पहले मध्यस्थता के प्रावधान का उपयोग करना चाहिए। इससे मुकदमों की संख्या में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि देश के सभी जिलों में याचिका पूर्व मध्यस्थता को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि याचिका पूर्व मध्यस्थता से संबंधित कोई शैक्षणिक कोर्स भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से चर्चा की है। बार काउंसिल इस बात पर सिद्धांततः सहमत है कि ऎसे कोर्सेज तैयार किए जाएं। उन्होंने न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी सभी संस्थाओं को अपने आप में सुधार करने पर जोर दिया।

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट सहित देशभर की विभिन्न अदालतों में बरसों से मुकदमें लंबित हैं। वर्तमान में केवल राजस्थान उच्च न्यायालय में साढ़े चार लाख और अधीनस्थ न्यायालयों में 17 लाख से ज्यादा केस लम्बित हैं, जो चिंता का विषय है। न्यायाधीशों के रिक्त पद भरकर इसका समाधान किया जाना चाहिए, ताकि सबको न्याय सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने देश में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए राजनीतिक दलों की फंडिंग को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। श्री गहलोत ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की मजबूती के लिए राज्य सरकार कोई कमी नहीं रखेगी। न्यायपालिका से जब भी कोई प्रस्ताव आया है, हमने उसे मंजूर किया है। हाल ही में न्यायिक व्यवस्था से जुडे़ ढाई हजार पद स्वीकृत किए हैं, जिससे न्यायिक कायोर्ं में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार वकीलों की भावनाओं का पूरा सम्मान करती है, लेकिन वकीलों को आमजन के हित में बार-बार हड़ताल नहीं करनी चाहिए। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय का यह नवीन भवन वास्तु कला का नायाब नमूना है। श्री गहलोत ने कहा कि उन्होंने प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते इस भवन का सपना देखा था। वर्ष 2006 में भूमि आवंटित हुई और 2007 में इसकी नींव डाली गई। भव्य भवन निर्माण के लिए अपने दूसरे मुख्यमंत्री काल में मैंने एक साथ 110 करोड़ रूपए स्वीत किए थे और आज यहां इतनी भव्य तथा आधुनिक इमारत बनकर तैयार हो गई है। इसके उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति एवं सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सहित इतने न्यायाधीशों का आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि वादियों एवं वकीलों की सुविधा के लिए राज्य सरकार अधीनस्थ न्यायालय के लिए हाईकोर्ट के नवीन भवन के पास ही जमीन आवंटन करने को तैयार है। श्री गहलोत ने जोधपुर की न्यायिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के अधिवक्ताओं का देशभर में बड़ा सम्मान है। यहां के कई अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में प्रतिष्ठा हासिल की है। विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यहां के कई न्यायमूर्ति रहे हैं। श्री आरएम लोढ़ा ने देश के मुख्य न्यायाधीश बनकर यहां का गौरव बढ़ाया है। यहीं के श्री दलवीर भण्डारी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय मेें जज बने।

केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज तक किसी अन्य हाईकोर्ट भवन के उद्घाटन में इतनी बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधिपतियों ने भाग नहीं लिया होगा, जितना आज के समारोह में भाग लिया है। उन्होंने कहा कि नवीन भवन राजस्थानी कलात्मकता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में सती प्रथा निवारण जैसे कई प्रगतिशील कानूनों की रचना की गई है। उन्होंने बताया कि देश की महिलाओं की सुरक्षा के लिए विभिन्न कानून बनाए गए है। श्री रविशंकर ने भारतीय न्यायिक व्यवस्था को गौरवान्वित करने वाली बताते हुए कहा कि श्रीलंका में हुए कॉमनवेल्थ देशों के सम्मेलन में बताया गया कि श्रीलंका भारत के उच्चतम न्यायालय से प्रेरणा लेता है। उन्होंने भारतीय न्यायिक व्यवस्था में टैंलेंट को आकर्षित करने और फास्ट ट्रेक न्यायालयों के माध्यम से त्वरित न्याय दिलाने के प्रयासों का भी जिक्र किया।

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांती ने कहा कि यह मेरे जीवन का सर्वाधिक गर्व का पल है कि इतनी बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट व विभिन्न राज्यों के न्यायाधिपति, जिला न्यायाधीशों, पूर्व न्यायाधिपति, वरिष्ठ अधिवक्ता, सांसद, मंत्री परिषद, विधायक, अधिवक्ताओं सहित प्रबुद्व वर्ग, गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में इस नवीन भवन का उद्घाटन होने जा रहा है। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कानून पर सभी को विश्वास है और यही कारण है कि विधि से जुड़ा हर व्यक्ति, आमजन के इसी विश्वास को ध्यान में रखकर कार्य करता है। भविष्य में भी आमजन के विश्वास को बनाए रखना है। इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी विधि से जुड़े हम सभी न्यायाधिपतियों और अधिवक्ताओं की है। उन्होंने राजस्थानी भाषा में ‘खम्मा घणी’ कहने के साथ अपना स्वागत उद्बोधन समाप्त किया।


समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह् के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय के नवीन भव्य भवन की प्रतिकृति भेंट की गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं अन्य अतिथियों ने डाक विभाग की ओर से तैयार उच्च न्यायालय के नवीन भवन के आवरण चित्र का विमोचन किया।

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इस अवसर पर केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति एम वी रामन्ना, अरूण मिश्रा, नवीनसिंहा, अरूण रस्तोगी, दिनेश माहेश्वरी, रविन्द्र भट्ट उच्च न्यायालय न्यायाधीश, ऊर्जा मंत्री बी डी गप्ता, मुख्य सचिव डी बी गुप्ता, जिला एवं अधिनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीश, सीनियर एडवोकेट्स प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी उपस्थित थे।

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