नीट गर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक कॉलेजों पर भी लागू : सुप्रीम कोर्ट

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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नीट लागू किया जाना मेरिट की पहचान, चयन और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चि करता है। वर्तमान समय में शिक्षा चैरिटी के वास्तविक रूप से अगल हो गई है, यह मात्र एक वस्तु बनकर रह गई है।

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अदालत ने कहा, इसे प्रणाली से बुराइयों को हटाने के लिए और भ्रष्टाचार को हटाने के लिए लाया गया। नियामक उपाय धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक द्वारा संचालित प्रशासकों के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करता है।

पीठ ने पाया कि यह दावा करना सही नहीं है कि अल्पसंख्यक संस्थानों के पास पूरी स्वायत्ता होगी।

अदालत ने कहा, प्रणाली से बुराइयों को हटाने के लिए राज्य को सहायता प्राप्त/गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक/निजी संस्थानों के लिए संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत नियामक उपायों को निर्धारित करने का अधिकार है। खराब प्रणाली दाखिला प्रक्रिया में ईमानदारी को समाप्त कर रहे थे, बिना वजह के आम छात्रों की आकांक्षाओं को धूमिल कर रहे थे।

शीर्ष अदालत ने पाया कि नीट को विधायिका द्वारा बड़े जनहित के लिए लाया गया था, जिसे बरकरार रहना चाहिए।

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–आईएएनएस

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