जयपुर में पीर गनी का मंचन 2 अप्रेल को

जयपुर कश्मीर के भटके नौजवानों को देश से जोड़ने का संदेश देने वाले ‘‘नाटक पीर गनी‘‘ का मंचन जयपुर में विद्याश्रम स्कूल के महाराणा प्रताप सभागार में श्री सीमेन्ट लिमिटेड की ओर से 2 अप्रेल, 2016 को मंचित किया जाएगा। इस नाटक का निर्देशन केके रैना कर रहे हैं, नाटक का भारतीय परिप्रेक्ष्य में बदलाव इला जयपुर में पीर गनी का मंचन 2 अप्रेल को 1रूण ने किया है। इस पहल को राजस्थानी कला, संस्कृति, साहित्य एवं ललितकला को बढ़ावा देने वाला संगठन राजस्थान फोरम और जयपुर सिटीजन फोरम के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। आज आयोजित प्रेस वार्ता में आयोजको ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

राजस्थान फोरम की सदस्या संगीता जुनेजा ने आगंतुको का राजस्थान फोरम की तरफ से स्वागत किया तथा साथ ही श्री सीमेंट के सहयोग का धन्यवाद दिया तथा राजस्थान फोरम द्वारा प्रदेश में कला और संस्कृति के क्षेत्रों में किये जा रहे विविध कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसके पश्चात जयश्री पेड़िवाल ने जयपुर सिटीजन फोरम का परिचय देते हुये 2 अप्रैल को होने वाले कार्यक्रम की जानकारी दी। साथ ही बताया के नॉर्वे के नाटक का इस तरह भारतीयकरण किया गया हैं कि वह वैश्वीकरण का जबरदस्त उदाहरण बन पड़ा है।

कलाकार ईला अरूण ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम राजस्थान फोरम के शुक्रगुजार है कि उन्होने हमें इस नाटक को यहां लाने का मौका दिया। यह नाटक नार्वे के प्रख्यात नाट्य लेखक हेनरिक इबसन के नाटक ‘‘पीर ज्ञान्त‘‘ पर आधारित है वास्वतिक रूप में यह साढ़े सात घंटे का नाटक है जिसे ढ़ाई घ्ंाटे में रूपान्तरण किया गया है, जिसमें मुझे 4 साल लग गये। नॉर्वे भौगोलिक रूप से कश्मीर के काफी निकट रहा है। ऐसा महसूस होता है जैसे यह नाटक कश्मीर के लिये ही लिखा गया है। यह नाटक ये बताने के लिये है कि वास्तव में कश्मीर में क्या हो रहा है, बहुत से लोग यह नहीं जानते और बहुत से लोगों का अपना खुद का दृष्टिकोण है। मैने इस रूपान्तरण में यह ध्यान में रखा है कि इसकी संवेदनायें बनी रहे और मैं आप सभी को यह कहना चाहती हूं कि कश्मीर हम सबका अहम हिस्सा है। जयपुर से अपने जुड़ाव के बारें में बताया कि वे रविन्द्र मंच की ऋणी है और आज वे जो कुछ भी वह जयपुर की ही देन हैं। उनहोनें बताया कि उनकी थियेटर के अभिनय जीवन की शुरूआत 40 वर्ष पूर्व जयपुर के रवीन्द्र मंच से शुरू हुई और मुझे स्वर्गीय पिंचु कपूर, मोहन महर्षि, भारत रत्न भार्गव, भानू भारती जैसे दिग्गज कला प्रतिभाओं के साथ काम करने का अवसर मिला।
वहीं निर्देशक के के रैना ने अपने सम्बोधन में कहा कि जब भी हम लोग नाटक और कश्मीर की बात करते है तो लोगों के जेहन में हमेशा यह आता है कि यह शायद राजनीति से जुडा मसला होगा। लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है। इस कहानी में एक आम लड़का है जो कि स्वाभाविक रूप से बड़ा बनना चाहता है लेकिन उसके ईदगिर्द चल रही राजनीति में वह उलझकर बहुत बड़ा बनने के बाद फिर से धरती पर वापस उतरने की कहानी है। मैने निर्देशन के साथसाथ इस नाटक में बुढ़े पीर घनी का किरदार निभाया है। अपनी प्रासंगिकता को लेकर यह नाटक बेहद लोकप्रिय है। जयपुर में पहली बार किये जा रहे इस नाटक में तीस सदस्यों का कलाकार सहायकों का प्रोडक्शन हैं। कार्यक्रम का संचालन राजस्थान फोरम की सदस्या सालेहा गाज़ी ने किया।