भारत माला प्रोजेक्ट: किसानों की अधिग्रहित जमीन का मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग

Rajasthan Farmers demanded market price DLC Rates for PM Modi Bharat Mala Pariyojana project

बाड़मेर। भारत माला प्रोजेक्ट (PM Modi Bharat Mala Pariyojana) के तहत जामनगर से अमृतसर (Jamnagar to Amritsar) तक निकलने वाले नेशनल हाइवे (National Highway) 757 के लिए अवाप्त की जा रही भूमि की मुआवजा राशि कम देने से जिले के किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक्सप्रेस राजमार्ग के भारत माला प्रोजेक्ट बीच आ रही भूमि के अधिग्रहण पर राज्य सरकार के द्वारा तय की गई डीएलसी रेट (DLC Rates) के विरोध में किसानों ने बालोतरा उपखंड अधिकारी (Balotra Sub Division) को प्रधानमंत्री(PM Narendra Modi) के नाम का ज्ञापन दिया। किसानों ने इस जमीन की डीएलसी रेट केंद्र सरकार से तय कराने की मांग की है। किसानों ने विरोधस्वप उपखंड मुख्यालय पर अनिश्चिितकालीन धरना शुरु कर दिया है।


उपखंड मुख्यालय पर मौजूद किसानों ने बताया कि पंजाब के अमृतसर से लगाकर राजस्थान के हनुमानगढ़ बीकानेर नागौर जोधपुर बाड़मेर जालौर जिलों से होते हुए गुजरात के जामनगर तक नए बनने वाले एक्सप्रेस हाईवे 757 के निर्माण के लिए आवाप्त की जाने वाली भूमि का मुआवजा डीएलसी रेट से 3 गुना अधिकतम दिया जा रहा है।

Rajasthan Farmers demanded market price DLC Rates for PM Modi Bharat Mala Pariyojana project


उन्हेाने उप जिला कलैक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि भूमि अवाप्ति अधिनियम 2013 के तहत यह नियम है कि कोई भी हाईवे 2 राज्यों या उससे अधिक राज्यों को जोड़ता है तो उसमें मुआवजे की राशि केंद्रीय सरकार द्वारा तय की जाती है, जबकि इस हाइवे में राजस्थान में अधिग्रहित की जा रही जमीन की राशि राजस्थान सरकार द्वारा तय की गई है। जो यहां की कम डीएलसी रेट के कारण किसानों को 40 से 45 हजार से लगाकर 60 से 65000 के बीच में प्रति बीघा के हिसाब से दी जा रही है। जिसके विरोध स्वरूप 29 नवंबर 2019 से बालोतरा उपखंड मुख्यालय पर डाक बंगले के आगे इस अवाप्ति से प्रभावित किसान ब्लॉक सिवाना पचपदरा सिणधरी के किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है।

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किसानेां के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिला कलैक्टर के मार्फत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय सड़क परिवहन केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देकर इस मामले में किसानों की सुनवाई करने की मांग की है, ताकि किसानेां को उनकी जमीनों का उचित मुआवजा मिल सके।

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