‘भागवत श्रवण से मनुष्य का लौकिक व आध्यात्मिक विकास संभव’-मारूतिनंदन महाराज

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मारूतिनंदन महाराज की भागवत कथा में उमड़ा जन सैलाब
जयपुर। कथा की सार्थकता जब ही सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें, अन्यथा यह कथा केवल ‘मनोरंजन’, कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। यह बात हाथी बाबू मार्ग, बनीपार्क स्थित श्रीराधा दामोदर मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तीसरे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे परमपूज्य पंडित मारूतिनंदन शास्त्री जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि  स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।

मारूतिनंदन महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।

कथा वाचक मारूतिनंदन शास्त्री जी महाराज ने सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से प्रहलाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया।ऐसे बढ़ाएं अपने JIO 4G की इंटरनेट स्पीड, इस तरह करें सेटिंग्स में बदलाव

मारूतिनंदन शास्त्री जी महाराज ने अपने श्रीमुख से दक्ष यज्ञ की कथा, जड़ भरत की कथा व अजामिल उपाख्यान सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा व्यास ने अपने मधुर कंठ से संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर अनेकों भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने एवं नृत्य करने को विवश कर दिया। अन्त में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण कराया गया। कथा की व्यवस्था में सौरभ गोयल, मुकेश अग्रवाल, राजबहादुर सिकरिया, प्रीति गाडिय़ा आदि मौजूद रहे।

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