राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) विधेयक, 2016 पारित

जयपुर। राज्य विधानसभा ने राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) विधेयक, 2016  को ध्वनिमत से पारित कर दिया। शिक्षा राज्य मंत्री प्रोफेसर वासुदेव देवनानी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऎतिहासिक विधेयक है, जो शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि इससे निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और शिक्षा के अधिकार के उद्देश्यों की पूर्ति और अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यालयों का निजीकरण तो चाहती है, लेकिन उसका व्यावसायिकरण नहीं चाहती। राज्य सरकार के प्रयासों से सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था में सुधार आ रहा है और जो नामांकन पिछले तीन वर्षों से 4-4 लाख घट रहा था, वह इस साल साढ़े आठ लाख बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष यह नामांकन और बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार भी आ रहा है और इस वर्ष बोर्ड के परिणामों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

प्रो. देवनानी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 34 हजार 92 निजी विद्यालय हैं, जिनमें 4 हजार 797 प्राथमिक, 15 हजार 695 उच्च प्राथमिक तथा 13 हजार 600 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा अप्रत्याशित रूप से फीस वृद्धि को रोकने के लिए प्रदेश में 1 अगस्त, 2013 को फीस एक्ट लागू किया था। इसके लिए पूर्व न्यायाधीश श्री शिवकुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। यह समिति 3 वर्ष तक सिर्फ 9 हजार 483 विद्यालयों की फीस ही तय कर सकी। इस तरह सभी विद्यालयों के फीस निर्धारण में लंबा वक्त लगता। साथ ही इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में वाद दर्ज हुआ, जिसके तहत इस पर अंतरिम निषेधाज्ञा लागू हो गई।

शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत न तो फीस निर्धारण के बाद अपील का अधिकार था और न ही निर्धारण में अध्यापकों या अभिभावकों की कोई भूमिका थी। इसी तरह व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार भी इस व्यवस्था में नहीं था। प्रो. देवनानी ने कहा कि इसके लिए महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और हरियाणा के पैटर्न का अध्ययन किया गया और राजस्थान की आवश्यकता के अनुकूल इस विधेयक को तैयार किया गया। उन्होंने आश्वस्त किया कि यह विधेयक राजस्थान बोर्ड के साथ ही सीबीएसई मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होगा। शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि इसमें फीस निर्धारण के लिए तीन स्तर होंगे। पहले स्तर पर मैनेजमेंट, प्रधानाचार्य, 3 अध्यापक और 5 अभिभावकों की समिति होगी, जो विभिन्न कारकों का अध्ययन कर फीस निर्धारण का कार्य करेगी। अभिभावकों का चयन लॉटरी से होगा। दूसरे स्तर पर संभागीय आयुक्त या खंड आयुक्त के स्तर पर एक समिति होगी। इसके बाद तीसरी अपील के लिए राज्य स्तरीय समिति का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि 30 दिन में समिति के गठन का प्रावधान है और 90 दिन में इसकी बैठक आयोजित होगी।

प्रो. देवनानी ने बताया कि विधेयक पारित होने के बाद पुस्तक एवं स्टेशनरी विक्रय के लिए नियम व निर्देश भी अलग से जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जो पुस्तकें पाठ्यक्रम में शामिल होंगी, विद्यालय प्रबंधन को उसकी पूरी सूचना एक माह पूर्व नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी। साथ ही कम से कम 3 विद्यालयों पर इस सामग्री का क्रय भी सुनिश्चित करना होगा, जिससे किसी एक दुकान का एकाधिकार नहीं हो। उन्होंने बताया कि शिक्षण सामग्री पर विद्यालय का नाम भी नहीं होगा। साथ ही यूनिफॉर्म एक बार तय होने के बाद कम से कम पांच साल तक नहीं बदली जाएगी। इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के संशोधित प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।