बदलती तकनीकी परिस्थितियेां में राष्टीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना जरुरी-थल सेनाध्यक्ष

बीकानेर । थल सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने कहा है कि वर्तमान समय में बदलती तकनीकी परिस्थितियेां में राष्टीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना जरुरी है। इसलिए इस प्रकार के युद्वाभ्यास का आयोजन किया जाता है। वे शनिवार को युद्वभ्यास शत्रुजीत 2016 मापन के मौके पर पत्रकारेां से बातचीत कर रहे थे।
थलसेनाध्यक्ष ने कहा कि स्ट्राइक कोर 1 के सभी टू्रप्स की कड़ी मेहनत की सराहना की और आपरेशनल प्लान की लगातार समीक्षा के महत्व पर बल देने की बात कही।

न्यूक्लियेर वार की चुनौति को लेकर मीडिया द्वारा किये गए सवाल का सेनाध्यक्ष टाल गए और कहा कि युद्वाभ्यास शत्रुजीत 2016 पूरी तरह से सफल रहा है और इससे भारतीय सेना का दमखम बढ़ेगा। वंही भारतीय सेना किसी भी चुनौति का मुकाबला करने कें सक्षम है। उन्होने कहा कि इस सामरिक निर्देशित यु़द्धाभ्यास में आधुनिक युग के तकनीकीए हथियार प्रणाली और परिवर्तीत युद्ध व्यवस्था व थिएटर लडाई की अवधारणाओं को एकीकृत करके सेना के जवानों व अधिकारियेंा ने आपसी सामंजस्य किस प्रकार स्थापित किया जाता है इसकेा भी मुख्य रुप से सीखा है जो कि किसी भी चुनौति को मुकाम तक ले जाने में अह्म भूमिका निभाता है।

जनरल दलबीर सिंह ने यहंा युद्वाभ्यास क्षेत्र में दो दिन बिताए अैार अभ्यास का अवलोकन भी किया। इस दौरान जवानों व अधिकारियों से बात कर हौसला अफजाई करते हुए इस अभ्यास पर संतुष्टि जताई।

इससे पूर्व सेनाध्यक्ष ने शुक्रवार रात को दुश्मन के इलाकेंा में पैरा टू्रपर्स के द्वारा किये गए प्रदर्शन को भी देखा। पैरा ब्रिगेड के इन पैरा टू्रपर्स का अदम्य साहस को देखा। 1971 के युद्व में पेरा बिग्रेड की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। बांग्लादेश क्षेत्र में पेरा बिग्रेड की एक टुकड़ी ने अदम्य साहस दिखाया था।

उन्हेाने कहा कि दिन रात अभ्यास में दुश्मन के इलाके मे दूर तक प्रहार करना तथा एकीकृत हवाई-जमीनी लडाई के वातावरण में परीक्षण को परख रहें है। इस अभ्यास में टैंकों, तोपखाने और मिसाइलों की फायरिंग का मुख्य शामिल की गई। अभ्यास के दौरान तोपखाने और मिसाइल की फायरिंग से दुश्मन के ठिकानेां को किस प्रकार से नष्ट कर कब्जा किया इसका भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।