आरओ प्लांट्स से निकला पानी खेती के लिए उपयोगी है या नहीं, इसक जांच होगी – वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री

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जयपुर। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में बताया कि प्रदेश भर में आरओ प्लांट्स के जरिए निकलने वाले पानी की जांच कर पता लगाया जाएगा कि यह पानी खेती के लिए उपयोग में लाया जा सकता है या नहीं।
श्री विश्नोई प्रश्नकाल के दौरान विधायकों द्वारा पूछे पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान केवल चितौड़गढ़ के आरओ प्लांट्स को बंद करने के जवाब में उन्होंने कहा कि चितौड़गढ़ के लोग एनजीटी में गए और 23 अप्रेल, 2019 को फैसला आया, जिसकी पालना में इन आरओ प्लांट्स को बंद किया गया।
इससे पहले विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के मूल प्रश्न के जवाब में श्री विश्नोई ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में उपलब्ध अभिलेखानुसार गली मौहल्लों में भू जल दोहन कर संचालित आर.ओ. प्लांट की सूचना भी सदन की मेज पर रखी। उन्होंने बताया कि किसी भी औद्योगिक ईकाई को भूमि दोहन की अनुमति अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र केन्द्रीय भू जल प्राधिकरण (सी.जी.डब्लू.ए.) से प्राप्त करना आवश्यक है, ना कि पर्यावरण विभाग अथवा संबंधित जिला कलेक्टर से।
वन एवं पर्यावरण मंत्री ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों को भूमि जल दोहन की अनुमति केन्द्रीय भू जल प्राधिकरण (सी.जी.डब्लू.ए.) के कार्यक्षेत्र में है। उन्होंने कहा कि  अवैध इकाइयों की स्थापना/संचालन की जानकारी प्राप्त होने पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण)  अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के अन्तंर्गत कार्यवाही की जाती है। राज्य सरकार के आदेश दिनांक 14.07.2011 के द्वारा भू जल दोहन की अवैध इकाइयों पर कार्यवाही के लिए संबंधित जिले के जिला कलेक्टर अधिकृत हैं।
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