सहकारी बैंकों में अब आरटीजीएस एवं एनईएफटी से नही होगी अनियमितताएं

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अनियमितता की घटना पर प्रबंध निदेशक होंगे जिम्मेदार
जयपुर। रजिस्ट्रार सहकारिता डॉ. नीरज के. पवन ने केन्द्रीय सहकारी बैंकों के द्वारा आरटीजीएस एवं एनईएफटी के माध्यम से होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए 24 बिन्दुओं के निर्देश सभी केन्द्रीय सहकारी बैंकों को जारी किए हैं। डॉ. पवन ने बताया कि राज्य के कुछ केन्द्रीय सहकारी बैंकों जैसे अलवर, सीकर, चितौड़गढ (रावतभाटा), हनुमानगढ़, बूंदी में आरटीजीएस एवं एनईएफटी में अनियमितता किए जाने प्रकरण सामने आए थे। इसको देखते हुए गाइड लाइन जारी की गई है।
उन्होंने बताया कि गाइड लाइन की अनुपालना नही होने पर अनियमितता जैसी घटनाएं होती है तो कार्मिक के वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन में प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ-साथ बैंक के सेवा नियमों के तहत अनुशासत्मक कार्यवाही एवं संबंधित प्रबंध निदेशक भी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि एक ही पथ कार्मिक विशेष को अधिकतम तीन वर्ष तक रखा जा सकेगा तथा उसे एक से अधिक पदों का कार्यभार नही दिया जाएगा।
रजिस्ट्रार ने बताया कि शीर्ष बैंक खाते का नियमित मिलान करेगा, सीबीएस साफ्टवेयर आईडी के पासवर्ड एक दूसरे से साझा नही किए जाएंगे तथा समय-समय पर परिवर्तन भी किया जाएगा, बैंक या शाखा के अन्य बैंकों में वि़द्यमान खातों का भी नियमित मिलान होगा। शीर्ष सहकारी बैंक अपने सीबीएस साफ्टवेयर को अपडेट कराएगा। इसके अलावा ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खाते का नियमित मिलान सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉ. पवन ने बताया कि आरटीजीएस एवं एनईएफटी के लिए खुले गए खातों का दैनिक मिलान सुनिश्चित होगा। सीबीएस साफ्टवेयर द्वारा संतुलन चित्र, लाभ-हानि खाते व रिपोर्टस को ही उपयोग में लिया जाएगा। मैनुअल इंटरवेशन को बंद किया जाएगा। ब्याज दरों में परिवर्तन का विलय केवल प्रधान कार्यालय में ही उपलब्ध होगा तथा आरटीजीएस एवं एनईएफटी हेतु मैन्डेट फॉर्म लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि निर्देश जारी करने के पीछे मंशा यह है कि बैंकों में होने वाली इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके तथा बैंकों की अमानत में वृद्वि हो सके साथ ही जनमानस में सहकारी बैंकों के प्रति विश्वसनीयता बनी रहे।
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