रक्षा बंधन पर ‘श्रवण नक्षत्र एवं आयुष्मान योग’ का सयोंग बेहद खास, इस मुहूर्त में बांधे भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र

Raksha Bandhan 2020 auspicious time in aayushman yog on Rakhi

भाई-बहन का प्रमुख त्योहार है रक्षा बन्धन(Raksha Bandhan)
ज्योर्तिविद् विमल जैन
भाई-बहन के रिश्ते को अटूट व मधुर बनाने का पर्व है रक्षाबन्धन, श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन हर्ष उमंग व उल्लास के साथ मनाने की पौराणिक परम्परा है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार यह Rakhi पर्व 3 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 2 अगस्त, रविवार की रात्रि 9 बजकर 29 मिनट पर लग रही है जो कि अगले दिन 3 अगस्त, सोमवार को रात्रि 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। स्नान-दान-व्रतादि की पूर्णिमा 3 अगस्त, राखी सोमवार को ही मनाया जाएगा। आज के दिन श्रीसत्यनारायण व्रत कथा (Satyanarayan Vrat Katha ) का आयोजन किया जाता है तथा रात्रि में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

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रक्षा सूत्र बांधने का सही समय
पूर्णिमा तिथि पर ही राखी बांधने वाली बहनें 3 अगस्त, सोमवार को प्रातः 9 बजकर 29 मिनट (भद्रा)(aayushman yog) के बाद ही अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी सजा सकेंगी। बहनें अपने परम्परा के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, भाइयों के मस्तक पर टीका लगाकर, उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। तत्पश्चात् बहनें भाई को उपहार प्रदान करती हैं, साथ ही भाई भी उन्हें मंगल आशीर्वाद से सन्तुष्ट करके उनके जीवन की रक्षा का वचन देता है। रक्षा बंधन के समस्त पुनीत कार्य पूर्णिमा तिथि पर ही करना लाभप्रद रहता है। रक्षा सूत्र अपने पारिवारिक धार्मिक परम्परा के अनुसार ही बांधना चाहिए।

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ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर इस दिन धार्मिक विधि-विधान से अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा के पश्चात सप्त ऋषियों की भी पूजा करने का विधान है। उनके आशीर्वाद से मंगल कल्याण होता है। भविष्य पुराण के अनुसार विधि-विधानपूर्वक रक्षासूत्र धारण करने पर व्यक्ति के समस्त रोग उससे दूर रहते हैं, उसे जीवन भर आरोग्य सुख मिलता है।

रक्षा सूत्र धारण करने पर जाने-अनजाने जो भी अशुभ कार्य होते हैं, वे सभी नष्ट हो जाते हैं। इस पर्व को और अधिक खुशनुमा बनाने के लिए ज्योतिष गणना के मुताबिक राशियों के रंग के अनुसार रक्षा-बन्धन भाई-बहन के रिश्तों को और अधिक मधुर-स्नेहयुक्त बनाकर जीवन को खुशहाल कर सकते हैं।

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भाइयों के सौभाग्य में होगी वृद्धि
ज्योतिषविद् विमल जैन बतातें है कि रक्षाबन्धन के पर्व को और अधिक खुशनुमा बनाने के लिए राशियों के रंग के अनुसार बहनें यदि राखी बांधें तो भाइयों के सौभाग्य में वृद्धि तो होगी ही साथ ही उनको अन्य लाभ भी मिलेगा। सामान्यत: सुनहरा, पीला और लाल रंग की राखी बाँधने का रिवाज है।

इन रंगों की राखी बाँधने के साथ ही भाइयों के राशि के अनुसार भी राखी का रंग रखने से सौभाग्य में वृद्धि होगी। लाल रंग से जीवन में ऊष्मा व ऊर्जा का संचार होता है, वहीं पर सुनहले व पीले रंगों से प्रसन्नता मिलती है। आजकल राखियों के रंग के अनुसार राखी बांधने का प्रचलन बढ़ रहा है।

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राशियों के अनुसार रंग का चयन
रंगों का चयन द्वादश राशियों के अनुसार मेष-लाल, गुलाबी एवं नारंगी। वृषभ-सफेद एवं क्रीम। मिथुन-हरा व फिरोजी। कर्क-सफेद व क्रीम। सह-केसरिया, लाल व गुलाबी। कन्या-हरा व फिरोजी। तुला-सफेद व हल्का नीला। वृश्चिक-नारंगी, लाल व गुलाबी। धनु-पीला व सुनहरा। मकर व कुम्भ-भूरा, स्लेटी व ग्रे। मीन-पीला व सुनहरा।

प्रख्यात ज्योतिषविद् ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा या रक्षा बन्धन पर अपने कुल पुरोहित या श्रेष्ठ विद्वत्जन से अपनी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) अवश्य बंधवाना चाहिए। तत्पश्चात् उन्हें यथा सामर्थ्य भेंट व नकद द्रव्य देकर उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए। जिससे जीवन पर्यन्त सुख-समृद्धि खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता रहे।

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