राज्य के विशेष उत्पाद होंगे जी आई में पंजीकृत,सोजत की मेहंदी को शीघ्र मिलेगा भौगोलिक संकेतक

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जयपुर। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के शासन सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने कहा कि राज्य के भौगोलिक स्थिति के आधार पर बनाये जा रहे विशेष उत्पादों की पहचान कर उन्हें भौगोलिक संकेतक में पंजीकृत कराने के लिए एक विशेष तंत्र विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सोजत की मेहंदी को जी आई(भौगोलिक संकेतक) में शामिल कराने के लिए शीघ्र ही चैन्नई के जी आई सेंटर की टीम को बुलाया जाएगा। ताकि सोजत की मेहंदी को जी आई का दर्जा प्राप्त हो सकें।
श्रीमती सिन्हा शुक्रवार को शासन सचिवालय में राज्य के उत्पादों को भौगोलिक संकेतक में शामिल करने के लिए उद्योग, कृषि, हार्टीकल्चर, खाद्य, पर्यटन, वन विभाग एवं  विश्वविद्यालयों तथा भारत सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक को सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक की श्रेणी में किया जा सके। इसके लिए ऎसे उत्पादों से जुडे ऎतिहासिक साक्ष्यों, उत्पादों से जुडे विशेष तथ्यों के शोध के लिए विश्वविद्यालयों को विशेष सहायता भी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य की लुप्त हो रहे विशेष उत्पादों का संरक्षण किया जाएगा ताकि ऎसे उत्पाद पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढते रहें एवं रोजगार के साथ उत्पादों की गुणवत्ता भी बरकरार रखी जा सकी। उन्होंने कहा कि अभी राज्य के 15 उत्पाद ज्योग्राफीकल इंड्रीगेशन में पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जी आई पंजीकरण कराने वाले संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा पंजीकरण शुल्क का भी पुनर्भरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इस संबंध में जागरूक किया जाएगा। ताकि उनके स्तर पर बनने वाले उत्पाद जी आई में शामिल हो सकें तथा लोगों का आर्थिक सशक्तिकरण किया जा सके।
श्रीमती सिन्हा ने कहा कि संबंधित विभागों एवं विश्वविद्यालयों में जी आई के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त करने के लिए लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में उत्पादों को पेटेंट कराने के लिए भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जायेंगे। इसके तहत कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों को पेटेंट एजेंट बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में विशेष कार्यशालाओं के जरिये प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। ताकि उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सके। विश्वविद्यालयों में भी पेटेंट ऑफिसर नियुक्त करने के संबंध में निर्देेश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जी आई एवं पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए पोर्टल से को जोडा जाएगा तथा पर्यटन, कृषि, उद्योग, कला एवं संस्कृति और शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित कर विशेष नीति के तहत कार्य किया जाएगा।
डीपीआईटी, भारत सरकार के उपरजिस्ट्रार सी.जी नायडू ने कहा कि भारत सरकार की ओर से राज्य में भौगोलिक संकेतक में पंजीकृत उत्पादों के डीलर्स एवं संभावित उत्पादों को शामिल के लिए एक कार्यशाला आयोजित की जायेगी। जिससे जी आई से संबंधित विभिन्न समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकें और मार्गदर्शन मिल सके। बैठक में संबंधित विभागों में प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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