मासूम ने जीती मौत से जंग

महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों की सूझबूझ से बची मासूम की जान
मासूम ने जीती मौत से जंग 1जयपुर। शहर के सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों को लगभग आधा घंटे की कड़ी मशक्कत एवं सूझबूझ से दो वर्षीय मासूम की जान बचाने में सफलता मिली है। यह मासूम जिन्दगी मौत से जूझ रही थी, सांसों की रफ्तार थम गई थी, पर कहते है कोशिशे कामयाब होती है।
हुआ यूं कि मंगलवार को प्रातः 10.30 बजे मासूम विक्रम पुत्र कृष्ण मीणा निवासी नारद बाबा की ढाणी तन ग्राम पंचायत श्रीराम की नांगल अपने घर के बाहर खेल रहा था कि खेल-खेल में अचानक कूलर के पम्प में लगने वाली चकरी वस्तु निगल गया। डेढ इंच लम्बी तथा एक इंच व्यास की यह चकरी उसकी श्वास नली ;ट्रैकियाद्ध के मुंह पर ढक्कन की तरह फंस गई। ना ही सांस लिया जा रहा था तथा ना ही निकाला जा रहा था। मासूम ने जीती मौत से जंग 2विक्रम छटपटाने लगा। जब उसके परिजनों की निगाह उस पर गई तो वक्त की नजाकत को भांपते हुए उसे तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजैन्सी में भर्ती कराया जहां उसे कॉर्डियक क्लिनिकल एसोसिएट डॉ. मुकेश गुप्ता ने देखा। डॉ. गुप्ता अमेरिकन कॉर्डियक लाइफ सपोर्ट के ऑथोराइज्ड ट्रेनर हैं। उन्हें साथ मिला अनुभवी नर्सिंगकर्मी भगवान सहाय स्वर्णकार का। बच्चे का शरीर शिथिल पडता जा रहा था। चिकित्सा टीम ने तुरंत मामूम विक्रम का हैल्मिच मैन्यूवर एवं सीपीआर करना शुरू किया। इस दौरान नुकीली फिरकनी नुमा वस्तु गले तक आई गई फिर भी फंसी रही। जब डॉ. गुप्ता एवं नर्सिंगकर्मी भगवान ने मासूम के सीने को जोर से दबाव दिया देकर अटकी हुई फिरकी को आगे बढाने की कोशिश की। फिर जब बात नहीं बनी तो दूरबीन की सहायता से अन्दर देखा तो पाया कि वस्तु फंसी हुई है। इधर चिकित्सकों के सामने यह भी चुनौती थी कि मासूम का गला छिल ना जाए, उसे बचाना भी जरूरी था। आखिरकार जोर से सीना पुश किया और यंत्रों की सहायता से उसे खींचकर निकाल ही दिया तब जाकर मासूम विक्रम की जान लौटी और श्वसन क्रिया फिर से शुरू हुई। बालक की गम्भीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने इसे पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया। बालक अब अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।
ये स्टाफ रहा मौजूदः जिस समय मासूम विक्रम के परिजन उसे महात्मा गांधी अस्पताल की इमरजैन्सी में लेकर आए उस समय डॉ. जी. एस. चौधरी, नर्सिंगकर्मी भुवनेश, धर्मराज सहित अन्य नर्सिंगकर्मी भी मौजूद थे।

इनका कहना हैः विक्रम को भगवान ने नया जीवन दिया है। यदि समय पर अस्पताल की आपात इकाई मंें पहुंच जाये तो रोगी की जान पर मंडराये खतरे को 90 प्रतिशत मामलों में टाला जा सकता है। अनुभवी नर्सिंगकर्मी भगवान सहाय स्वर्णकार का सहयोग सराहनीय रहा। डॉ. मुकेश गुप्ता (कॉर्डियो फिजीशियन), महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर।

डॉक्टर भगवान का रूप होते है। जो तत्काल सुविधा महात्मा गांधी अस्पताल की इमरजैन्सी में मिली वह सुविधा ना मिलती तो शायद बच्चा समय के अभाव में प्राण त्याग देता।
विक्रम के पिता कृष्ण मीणा,
नारद बाबा की ढाणी, ग्राम श्रीराम की नांगल,सांगानेर
कुशल क्षेम पूछीः ग्राम पंचायत श्रीराम की नांगल के सरपंच नाथूलाल जांगिड़ ने बताया कि यह पहली बार नहीं जब महात्मा गांधी अस्पताल हमारे लिए वरदान साबित हुआ है। इससे पहले भी कई बार अस्पताल की कुशल आपात सेवाओं ने स्थानीय निवासियों को कभी निराश नहीं किया।