दुनिया को, भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अद्भुत देन है आयुर्वेद

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बीकानेर। संसदीय सचिव डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि आयुर्वेद, सबसे पुरातन चिकित्सा पद्घति है। यह दुनिया को, भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अद्भुत देन है। संसदीय सचिव बुधवार को सार्दुलगंज में पतंजलि चिकित्सालय के नए भवन के शुभारम्भ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद सभी चिकित्सा पद्तियों में से श्रेष्ठ है। स्वामी रामदेव द्वारा इस पद्ति के प्रोत्साहन के लिए किया जा रहा कार्य अनुकरणीय है।दुनिया को, भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अद्भुत देन है आयुर्वेद 1

उन्होंने कहा कि योग एवं प्राणायाम हमारे दैनिक क्रियाकलाप का हिस्सा हुआ करते थे। धीरे-धीरे हम इनका महत्त्व भूलते गए। आज हमें इनकी कद्र करनी होगी। उन्होंने कहा कि योग एवं प्राणायाम की नियमित साधना से, अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह ‘शून्य बजट आधारित’ चिकित्सा पद्घति है, जिसे अनेक संतों-महापुरूषों ने लम्बे शोध के बाद हमें दी है।
सीकर सांसद स्वामी सुमेधानंद ने कहा कि स्वामी रामदेव ने वेदों एवं आयुर्वेद गं्थों की धरोहर को नए रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के पिछडऩे का मूल कारण, इस दिशा में शोध की कमी रहा है। आज इस दिशा में बेहतर शोध कार्य हो रहे हैं और आयुर्वेद्घ पद्ति का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। उन्होंने कहा कि प्राणायाम के नियमित अभ्यास से सूक्ष्म कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं, जिससे अनेक रोगों से मु€ित मिलती है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इस दिशा में चिंतन, मनन और अनुसंधान करने चाहिए। बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र की विधायक सिद्घि कुमारी ने पतंजलि के नए चिकित्सा भवन के लिए शुभकामनाएं दी तथा कहा कि इससे शहरवासियों को लाभ होगा।
पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी ने कहा कि योग, प्राणायाम एवं आयुर्वेद चिकित्सा हमारे देश में हजारों सालों से विद्यमान है। अंग्रेजों के आधिपत्य में आने के साथ यहां अनेक विदेशी कंपनियां आईं और उन्होंने देश में लूट मचाई। स्वामी रामदेव ने आयुर्वेद की परम्परा को पुनर्जागृत किया है। अनेक संत इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। आज हमारी बोलचाल, पहनावा और सभ्यता पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव साफ देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि चरक, सुश्रुत और पतंजलि जैसे ऋषि-मुनियों ने हमें जो ज्ञान दिया है, उससे गंभीर से गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।दुनिया को, भारतीय संस्कृति की अनुपम एवं अद्भुत देन है आयुर्वेद 2
अध्यक्षता करते हुए बाड़मेर के तारातारा मठ के महंत स्वामी प्रताप पुरी ने कहा कि स्वामी रामदेव ने देश को आयुर्वेद के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है। आयुर्वेद एक अमोध चीज है, इसकी बारीकियों को सीखना एवं समझना चाहिए। उन्होंने गुरू के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया तथा कहा कि इसी मार्ग पर चलकर ही हम सुख और समृद्घि प्राप्त कर सकते हैं। इससे पहले चिकित्सालय प्रभारी सुभाष शास्त्री ने बताया कि चिकित्सालय में पतंजलि एवं दिव्य फार्मेसी की सभी दवाईयां मिलेंगी तथा चिकित्सक की सुविधा भी नि:शुल्क रहेगी। प्रत्येक मरीज का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा तथा हरिद्वार में बैठे रोग विशेषज्ञों के माध्यम से गंभीर बीमारियों के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकेगा।
आगंतुकों का आभार डॉ. हनुमान कस्वां ने व्य€त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंद्रशेखर श्रीमाली ने किया। इससे पहले अतिथियों ने चिकित्सालय भवन का अवलोकन किया तथा यहां उपलŽध सुविधाओं को देखा। इस अवसर पर कृषि मंडी के चेयरमेन सहीराम दूसाद, ताराचंद सारस्वत, सेसोमू चेयरमेन जे. पी. मूंधड़ा, डॉ. नरेश गोयल, कोडाराम भादू, डॉ. एस. डी. दवे, नरेन्द्र आर्य, कृष्ण कुमार गौड़, कांसेप्ट के निदेशक भूपेन्द्र मिढ्ढा, बेगाराम भादू, भागीरथ मूंड, तोलाराम जाखड़, पतंजलि के राज्य सह प्रभारी स्नेह नारंग, विजय लक्ष्मी, राम गोपाल बिश्नोई, मुकेश नैण, रविन्द्र आर्य, पद्मा मूंधड़ा, डॉ. विनिता श्रीमाली आदि मौजूद थे। उद्घाटन से पूर्व आर्य समाज एवं पतंजलि के सदस्यों ने हवन आयोजित किया। पतंजलि के दूसरे मेगा स्टोर का उद्घाटन मु€ता प्रसाद स्थित भवन में किया गया।