खनन में काम करने वालों को सुरक्षा, सम्मान और उपचार की जरुरत: यू.एन.

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खनन में मानवाधिकार के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि एवं हितधारकों की बैठक

@जी.एस.धालीवाल,जयपुर । संयुक्त राष्ट्र संघ (व्यवसाय एंव मानवाधिकार) के सदस्य सूर्या देवा ने कहा कि राज्य व केंद्र की सरकार को सुनिश्चिित करना चाहिए कि वे क्षेत्राधिकारी में चल रही खनन क्षेत्र की कंपनियां मानवाधिकारों का पूरी तरह से पालन करें। जिससे कि इस क्षेत्र में काम करने वालों केा सुरक्षा, सम्मान और उपचार मिल सके। सूर्या देवा गुरुवार को खान मजदूर सुरक्षा अभियान ट्रस्ट एवं विकास अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में खनन क्षेत्र में व्यवसाय, मानवाधिकार और उपचार की पहुंच पर आयेाजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के हरप्रीत कौर ने कहा कि कोई भी उधेाग या कंपनी चला रहे है तो उसमें कार्यरत जो भी काम कर रहें है उनकी सुरक्षा एंव कल्याण का दायित्व भी इसे चलाने वाले का ही बनता है। खनन क्षेत्र में श्रमिकों का स्वास्थ्य और सुरक्षा जो कि राज्य में कार्यरत श्रमिकेां का नियोजन केंद्र सरकार के अधीन है परंतु खनन पट्टा देने का दायित्व राज्य सरकार के पास है। इसलिए राज्य सरकार का यह भी दायित्व बनता है कि वे खनन मालिकों की मार्फत श्रम एंव नियेाजन का सम्मान सुरक्षित करावें, ताकि खनन मजदूरेां का मानव अधिकार सुरक्षित रहे।

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के पूर्व सदस्य आईपीएस डाॅ. एम.के. देवराजन ने कहा कि देशभर में खनन क्षेत्र में जो लेाग काम करते है उन्हे भी उपचार के साथ सम्मान मिलना चाहिए, ताकि उनका मानवाधिकार सुरक्षित रहे। हम सभी को इनके मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, तभी वे अच्छी जिंदगी जी सकेंगे।

आईपीएस डा.अमनदीप कपूर सिंह ने कहा कि खनन, सेफटी एंव सुरक्षा एक्ट का पालन करने और कराने की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। इन अधिनियमों का पालन समय पर हो तो खनन श्रमिकेां को कई तरह की बीमारियेां से बचाया जा सकता है और इन्हे आर्थिक रुप से सशक्त बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर खान मजदूर सुरक्षा अभियान ट्रस्ट के डा.राना सेन गुप्ता ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा खनन के क्षेत्र में अन्य प्रदेशों की जुलना में अच्छा काम किया है। जिसमें 33 जिलों में व्यवसायिक स्वास्थय से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन, सिलिकोसिस जैसी बीमारी की गंभीरता को समझते हुए उसे आपदा की श्रेणी लेना, देशभर में सर्वप्रथम सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ितों को सहायता राशि देने में पहल, जांच प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटलाइजेशन करना, सिलिकोसिस पुनर्वास नीति एंव कल्याण बोर्ड आदि शामिल है। इस अवसर पर टाटा सोशल सांइस की सहायक प्रोफेसर पेखम बसु ने खनन क्षेत्र में जेंडर के मुददों पर विचार रखे। इस संगोष्ठी में प्रदेशभर में खनन पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाअेां के प्रतिनिधियेां के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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