वंदेमातरम गीत और चटर्जी का उपन्यास बना आज़ादी के आंदोलन की प्रेरणा-कामिनी

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बीकानेर। प्रसिद्व साहित्यकार और वंदेमातरम गीत के रचियता बंकिमचंद्र चटर्जी की जयंती पर कल्याण फाउंडेशन कार्यालय जयनारायण व्यास कॉलोनी स्थित कार्यालय में स्मरण सभा आयोजित हुई।
कल्याण फाउंडेशन की निदेशक कामिनी भोजक ने चटर्जी के तेल चित्र पर पुष्पांजलि करते हुए कहा कि श्री बंकिमचंद्र चटर्जी भारत के पहले डिप्टी कलेक्टर थे और उनको शुरू से ही लेखन का शौक था डिप्टी कलेक्टर रहते हुए अंग्रेजी में लेखन शुरू किया उनका आँग्ल भाषा का उपन्यास राजमोहन्स वाइफ काफी लोकप्रिय हुआ उसके बाद हिंदी साहित्य में उनका लेखन आमलोगों की जुबां चढ़कर बोलने लगा जब बांग्ला में उनके लिखे शब्दो से लोग अपने बच्चो के नाम रखने लगे।
कामिनी भोजक ने कहा कि उनके उपन्यास आंनद मठ में उन्होंने देश को मातृभूमि मानने वालों की कहानी को दर्शाया और वंदेमातरम गीत भी इसी में था जो कि आगे चलकर यह उपनायस आज़ादी के आंदोलन की प्रेरणा बना। इसलिए उनके इस गीत को कालजाई रचना और देश को जोश देने का कारक मानते हुए आज़ादी के बाद राष्ट्रगान के समतुल्य मानते हुए वंदेमातरम गीत को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। कामिनी भोजक ने कहा कि आज भी हमारे देश को ऐसे ही वतन प्रेमी साहित्यकारों की आवश्यकता है जो देश मे फैल रही अराजकता को रोकने हेतु कलम से जागृति लाये।
शहर कांग्रेस प्रवक्ता नितिन वत्सस ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एक बड़े अधिकारी सम्पादक हिने के साथ साथ वे एक सच्चे साहित्यकार थे जिंदगी के अनुभवों को समझते हुए उसको कलम की ताकत के सहारे लोगो को सरल भाषा मे समझाने में कामयाब इंसान थे। देश और धर्म की रक्षा और उसका सरंक्षण हेतु वे लगातार अपने साहित्य में लिखते रहे वे एक सच्चे देश भक्त थे।
एडवेंचर फाउंडेशन के आर.के.शर्मा ने कहा कि चटर्जी एक  अच्छे साहित्यकार होने के साथ साथ कुशल व्यंगकार भी थे बांग्ला साहित्य की शैली में आमूल चूल परिवर्तन चटर्जी के लेखन के बाद ही हुआ उनके लेखन ने भारतीय जवानों में नई ऊर्जा का संचार किया और वे वंदेमातरम को गाते रहे अंग्रजो की यातनाओं को सहते रहे लेकिन आज़ादी के लिए पीछे नही हटे।
वरिष्ठ समाजसेवी सत्यदेव शर्मा ने कहा कि वंदेमातरम गीत लिखने वाले चटर्जी भारत देश के इतिहास में अमर रहैंगे उनका योगदान भारत के आज़ादी के आंदोलन में कम नही आंका जा सकता।
पुष्पांजलि सभा मे रेखा देवड़ा, बनारशी देवी चौहान ने उनके गीत गाकर शब्दाजंलि दी।
इस अवसर पर प्रज्ञा देवड़ा, जितेंद्र सेवग, विमल भोजक, कुमारी अदिति, रिद्धि, खनक खुश भोजक और जाना ने चटर्जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
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