राजुवास एवं कामधेनू गौशाला समिति, ऊना में हुआ आपसी करार

हिमाचल प्रदेश में गौ सरंक्षण, संवर्द्धन, पर्यावरण, अनुसंधान प्रशिक्षण एवं प्रसार का कार्य करेगा वेटरनरी विश्वविद्यालय

बीकानेर। वेटरनरी विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश की महावतार बाबाजी कामधेनू गौशाला समिति, थपलां (जिला ऊना) गौ सरंक्षण, गौ संवर्द्धन, पर्यावरण, अनुसंधान प्रशिक्षण एवं प्रसार का कार्य मिलकर करेंगे। इस आशय एक समझौते पर कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत और समिति के मनोनीत प्रतिनिधि कल्याणमल शर्मा (पूर्व आई.पी.एस.) ने सोमवार को एक आपसी समझौते पर हस्ताक्षर किए। कुलपति सचिवालय में आपसी करार के दस्तावेज एक दूसरे के सुपूर्द किए गए। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने बताया कि महावतार बाबा जी कामधेनू गौशाला समिति थपलां वर्तमान में 110 एकड़ भूमि पर लगभग 200 स्वेदशी गायों राठी, थारपारकर, नागौरी, सांचोरी, गिर, साहीवाल और रेड सिंधी नस्ल के दुग्ध उत्पादन, संवर्द्धन के साथ-साथ पशु चारा विकास और वनोषधियों व जड़ी-बूटियों के विकास हर्बल पार्क के क्षेत्र में कार्य कर रही है। समिति द्वारा पर्यावरण सुधार और जल सरंक्षण व पंचगव्य उत्पादन जैसे कार्यों में भी जुटी है। कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय दीर्घावधि समझौते के तहत इन कार्यों में साझेदारी के साथ अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रसार कार्यों के लिए कार्य करेंगे। समझौते के तहत वेटरनरी विश्वविद्यालय देशी गौवंश के विकास और संवर्द्धन के लिए राजस्थान और हिमाचल प्रदेश व देश के अन्य भागों से आने वाले पशुपालकों को पशु उत्पादन अधिकतम दुग्ध उत्पादन, ब्यांत अवधि कम करने संबंधी वैज्ञानिक प्रयास और प्रशिक्षण संबंधी कार्यवाही करेंगे। गौवंश संवर्द्धन के लिए गौशाला को एक मॉडल बनाकर वेटरनरी छात्रों के प्रायोगिक कार्यों का सब सेन्टर विकसित कर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देंगे। इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करके गायों के प्रजनन हेतु देश-विदेश में उपलब्ध उत्कृष्ट श्रेणी के सांड का वरण, प्रजनन अभिलेख व वंशावली के आधार पर वरण की कार्यवाही करेंगे। गौपालन को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए गौमूत्र, गोबर, गोव्यामृत, पाउडर का दूध, गौ धूपबत्ती सहित आयुर्वेदिक औषधियों के लिए आपसी सहयोग में कार्य करेंगे। इसके लिए आधुनिक प्रयोगशाला सथापित कर अनुसंधान किया जायेगा। प्रयोगशाला निष्कर्षों के आधार पर गौ सौन्दर्य प्रसाधन यथा साबुन, तेल, शैम्पू, दंतमंजन, अमृतातेल, गोफिनायल, हैण्डवॉश, फेश वॉश, आदि के निर्माण में भी सहयोग करेंगे। समझौतें के अनुसार गौशाला की 110 एकड़ भूमि में पशु चारा उत्पादन और नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित बीजारोपण और विकास के कार्य होंगे। वनोषधियों जड़ी-बूटियों व हर्बल पार्क के विकास कार्य किया जाएगा। पर्यावरण सरंक्षण के प्रति प्रशिक्षण के साथ ही वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने और भूमि की उर्वरा क्षमता बढ़ाए जाने जैसे विशिष्ट कार्य भी किए जायेंगे। पशुपालकों को पंचगव्य संबंधी प्रशिक्षण व पाठ्यक्रम तैयार करके पौराणिक पद्धति को पुर्नजीवित करने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। जैव-विविधता के संबंध में भावी अनुसंधान के कार्य भी किये जायेंगे। देशी गौ के उत्पादित दूध उत्पादों का मूल्य संवर्द्धन कर गौपालन को अर्थ सम्मत बनाने जैसे कार्य करना भी शामिल है। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि इन कार्यों के लिए आपसी सहयोग से कार्ययोजना बनाकर कार्य शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर वेटरनरी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. त्रिभुवन शर्मा, निदेशक पी.एम.ई. प्रो. ए.पी. सिंह, प्रो. राजीव जोशी और प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. आर.के. धूड़िया भी मौजूद थे। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय प्रदेश सहित पूरे देश में देशी गौवंश के संवर्द्धन और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध है। महाराष्ट्र प्रांत में भी थारपारकर देशी गौवंश क्लब की स्थापना की गई है।