देश की तरक्की के लिए गॅांवों का स्मार्ट होना जरूरी -राज्यपाल

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जोधपुर। राज्यपाल कल्याणसिंह ने कहा है कि देश की तरक्की के लिए गांव का स्मार्ट होना जरूरी है। इसके लिए ध्येय और जज्बा जरूरी है। राज्यपाल जोधपुर सर्किट हाऊस में ग्रामीणों से संवाद कर रहे थे। इन ग्रामीणों में बुजुर्ग, नौजवान, महिलाएं और छात्राएं शामिल थीें।
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राज्यपाल ने अपने 8 बिन्दुओं पर सकारात्मक परिणाम बताते हुए ग्रामीणों से प्रत्येक पर संवाद किया। उन्होंने कहा कि पुलिस विश्वविद्यालय द्वारा गांव गोद लेने के बाद पहले क्या था और अब क्या बदलाव हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि विश्वविद्यालय का पूर्ण सहयोग मिला तथा अधिकारियों एवं स्टाफ ने लगातार संपर्क बनाए रखा और गांव-गांव, गली-गली घूमकर स्वच्छता व शौचालय बनाने के कार्य भी किए। पशुओं के बारे में भी जानकारियां दीं। ग्रामीणों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पौधारोपण के लिए एक लाख रुपए की राशि भी दी। सीमा से लगते रोड़ के कनेक्शन हो गए। पानी तो नमकीन है मगर वर्षा जल संग्रहण के लिए तालाब वगैरह बने हुए है। गांव में बिजली आती है व दवाइयां भी पूरी मिलती है। स्वरोजगार में कृषि एवं मजदूरी के साधन है। गांव गोद लेने के बाद तब से अब तक बहुत फर्क महसुस हुआ है।
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राज्यपाल ने दिए छोटे-छोटे संदेश
राज्यपाल ने ग्रामीण-संवाद में आई छात्राओं से बड़े लाड़ के साथ कहा कि आप लोग उन लड़कियों के घर जाएं और स्कूल नहीं भेजने वाले माता-पिता के सामने अनशन तक कर दें। मतलब कोशिश करते रहे, ध्येय बनालें। जज्बा जब दिलों में होगा तो शिक्षा, स्वच्छता व नशा मुक्ति जरूर रंग लाएंगी। गांव वालों की तरफ से राज्यपाल को साफा पहिनाया गया। राज्यपाल ने मौके पर ही फूड-पैकेट दिए व कहा कि यहीं मेरे सामने भोजन करें तथा स्वयं उन्होंने भी वहीं फूड पैकेट से भोजन किया।
राज्यपाल ने राज्य को हर दृष्टि से बेहतर बताया 
राज्यपाल कल्याणसिंह ने इससे पूर्व प्रेस व मीडिया से अपने मन की बात करते हुए कहा कि मुझे 3 सितम्बर 2019 को 5 साल पूरे हो रहे है। इन 5 सालों में मुझे लगा कि राजस्थान के लोग सुशील, सभ्य व श्रमप्रिय है। प्रदेश में कानून व श्ांाति व्यवस्थ माकूल है। यहां के लोगों का स्वभाव भी बहुत अच्छा है सभी अपने काम से काम करते है। मुझें 5 साल बीत गए और समय का यहां रहते पता ही नहीं चला। मैं यहां की संस्कृति से बेहद प्रभावित हुआ हॅूं।
राज्यपाल ने कहा कि कुलाधिपति के रूप में मैने दीक्षांत समारोह के निर्णय लिए। मैने जब शपथ ली तो 32 हजार डिग्रीयां लंबित पड़ी थी। प्रत्येक वर्ष दीक्षांत की व्यवस्थाएं बदली और 3 पीढीयों तक की लंबित पड़ी डिग्रीयों का वितरण किया गया। आज मैं गर्व के साथ कह सकता हॅूं कि प्रदेश में अब कोई डिग्री लंबित नहीं है। हर वर्ष दीक्षांत हो रहे है। उन्होंने कहा कि गांव के लोग पढ़ना चाहते है। उन्होंने बालिका शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि लड़कियां डिग्री व स्वर्ण पदक लेने में अब अव्वल है।
इस मौके संभागीय आयुक्त बी.एल. कोठारी, पुलिस आयुक्त प्रफुल्ल कुमार, जिला कलेक्टर श्री प्रकाश राजपुरोहित एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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