85 प्रतिशत सचित्र बचाएगी युवाअेां को – चिकित्सक

बीड़ी से 5.80 लाख मौतें
बीकानेर। देशभर में तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादेां के प्रयोग से 12 लाख लोगों की असमय ही मौत हो रही है। इनमें अकेले बीड़ी से मरने वालेां की संख्या 5.8 लाख है। इन मौतों को रोकने में पैकेट्स पर 85 प्रतिशत हिस्से पर सचित्र चेतावनी बेहद कारगर साबित होगी। बढ़ी हुई सचित्र चेतावनी युवाअेंा व बच्चों को अपनी और आकर्षित होने से रेाकेगी।
पीबीएम के आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च सेंटर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा.राजेंद्र बोथरा ने बताया कि यंहा पर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा इत्यादि राज्येां से लेाग आते है जो कि कैंसर से पीड़ित होतें है। इनमें अधिकत तंबाकू उत्पादेां का सेवन करने वाले है। खासकर ग्रामीण व कल कारखोनंा में काम करने वाले मजदूर व निम्न वर्ग के लोग इसमें शामिल होतें है। तम्बाकू सेवन सबसे बडी मानव निर्मित त्रासदी है जिसके कारण देश में प्रतिवर्ष कुल हो रही मौतों में से बीड़ी 5 लाख 80 हजार, 3.5 लाख सिगरेट और 3.5 धूम्र रहित तंबाकू पदार्थों का उपयोग करने वाले शामिल है। वंही रोजाना 5,500 बच्चे तम्बाकू निर्मित उत्पादों जैसे सिगरेट, बीडी, गुटका, पान मसाला आदि की शुरूआत से कर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। इनमें 330 बच्चे व युवा अकेले राजस्थान के शामिल है। बीड़ी इन सब उत्पादेां से हानिकारक साबित हो रही है।
इसके लिए तंबाकू बीड़ी विक्टिमस ने ऑल इंडिया बीड़ी फैडरेशन व भारतीय मजदूर संघ व ऑल इंडिया बीड़ी इंडस्ट्री फैडरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर तंबाकू उत्पादेां पर सचित्र चेतावनी को पैकेट्स पर 85 प्रतिशत के निर्णय को यथावत रखने की मंाग रखी है।
बीड़ी सेवन से कैंसर का दंश झेल रहे पीड़ितों के द्वारा लिखे पत्र में बताया गया कि देश का आधे से ज्यादा हिस्सा आज भी ग्रामीण है और वेा कम पढ़ लिखे होतें है वंहा पर इसका उपयेाग भी अधिक होता है। इसका उपयोग करने वाला निम्न वर्ग व मध्यम वर्ग से ही संबध रखता है। इसलिए इन उत्पादों पर यदि सचित्र चेतावनी का आकार 85 प्रतिशत देानों तरफ होगा तो इसे खरीदने वाला इसके परिणाम को भी स्पष्ट रुप से देख सकेगा।
इसलिए इन उत्पादेां पर सचित्र चेतावनी व देश के इस उधेाग में कार्यरत मजदूरेां के लिए सरकार के साथ विभिन्न सामाजिक संगठन इनके पुनवार्स में सहयेाग देंगे।
मैक्स इंडिया फांउडेंशन की प्रमुख मोहिनी दलजीत सिंह ने बताया कि देश में बीड़ी कामगारेां के साथ सभी की हमदर्दी है, परंतु इसका मतलब यह नही कि सचित्र चेतावनी को 85 प्रतिशत से कम किया जाए। वंही इस बात का दुःख है कि सबसे अधिक मौत भी इसी के सेवन से होती है। इसलिए इसमे लगे कामगारेां को अच्छी स्किल्स देकर उन्हे अधिक आय वाले उधेागों से जोड़ा जाने की अधिक जरुरत है, ताकि वे अपना जीवन यापन कर सकें।
आसाम के बी बरुआ कैंसर अस्पताल एंव रिसर्च सेंटर के डा.अमल कतकी बतातें है कि पड़ौसी देशेंा में भारत से भी अधिक 90 प्रतिशत तक सचित्र चेतावनी इन उत्पादों पर है लेकिन वंहा पर इस प्रकार का विरोध तंबाकू लाबी के द्वारा नही हुआ। जबकि यंहा करीब 1 लाख 4 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक भार भी इससे होने वाली बीमारियेंा पर खर्च हो रहा है।
सवाई मान सिंह चिकित्सालय के ईएनटी स्पेशलिस्ट डा. पवन सिंघल बतातें है कि इन पैकेट्स पर 85 प्रतिशत हिस्से पर सचित्र चेतावनी छापने के कंेद्र सरकार व राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले के बाद तंबाकू लाबी इसे रोकने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। हालंाकि दुनिंयाभर के शोध बतातें है कि बढ़ी हुई सचित्र चेतावनी नये उपभोक्ताओं को हत्तोत्साहित करती है वंही युवाअेां केा भी बचाने में इसकी सकारात्मक भूमिका सामने आएगी।
उन्होेने बताया कि प्रदेश भर से अस्पताल में कैंसर के जो रेागी आते है उनमें अधिकतर बीड़ी व गुटखे का उपयेाग करने वाले होते है। इनमें मुंह,गले,जीभ,आहार नाल,जबड़े इत्यादि स्थानों पर कैंसर होता है जो कि असहनीय होता है। बढ़ते कैंसर के प्रभाव को कम करने के लिए यह सचित्र चेतावनी सकारात्मक कदम है।
डा. सिंघल ने बताया कि गोल्डन टोबैको कंपनी ने अपने उत्पादेां पर 85 प्रतिशत सचित्र चेतावनी को बाजार में उतार दिया है तो अन्य कंपनियेां को सरकार व न्यायालय के आदेश का सम्मान करना चाहिए।