Kalashtami Vrat : भारतीय संस्कृति और पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीभैरव जी को साक्षात भगवान शिव बाबा का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का एक स्वरूप भक्तों को अभय और कल्याण प्रदान करने वाला है, जबकि दूसरा स्वरूप श्रीभैरव के रूप में दुष्टों का संहार करने वाला माना जाता है।
प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन शिवस्वरूप श्रीभैरव जी की पूजा-अर्चना, व्रत और साधना करने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि श्रीभैरव जी के दर्शन, पूजन और व्रत से आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है तथा अकाल मृत्यु के भय, रोग, कष्ट और जीवन की विभिन्न बाधाओं का निवारण होता है।
ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन के अनुसार इस बार मासिक कालाष्टमी व्रत 8 जून 2026, सोमवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 7 जून रविवार को रात्रि 3 बजकर 25 मिनट से प्रारंभ होकर 8 जून सोमवार को रात्रि 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगी।
उन्होंने बताया कि शतभिषा नक्षत्र 7 जून प्रातः 7:56 बजे से 8 जून प्रातः 9:10 बजे तक रहेगा, जिसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा और 9 जून प्रातः 9:40 बजे तक प्रभावी रहेगा।
भैरव पूजा और व्रत का विशेष महत्व
ज्योतिर्विद् श्री विमल जैन के अनुसार जिन लोगों को शारीरिक, मानसिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं अथवा जो कर्ज के बोझ से परेशान हैं, उन्हें कालाष्टमी के दिन श्रीभैरव जी का दर्शन-पूजन कर व्रत अवश्य करना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से श्री अष्टभैरव की पूजा का विधान बताया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें तथा अपने आराध्य देव की पूजा के उपरांत श्रीभैरव व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पंचोपचार, दशोपचार या षोडशोपचार विधि से श्रीभैरव जी का पूजन करें।
पूजा के दौरान धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, फल और मिष्ठान्न अर्पित किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार श्रीभैरव जी को उड़द की दाल से बने बड़े, इमरती तथा अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
मंत्र जाप से मिलती है विशेष कृपा
श्रीभैरव जी की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं को—
“ॐ श्री भैरवाय नमः”
मंत्र का जाप करना चाहिए।
कर्ज मुक्ति और आर्थिक समस्याओं के निवारण हेतु यह विशेष मंत्र भी बताया गया है—
“ॐ ऐं क्लीम् ह्रीं भम् भैरवाय मम ऋण विमोचनाय महा महाधनप्रदाय क्लीं स्वाहा”
इस मंत्र का 11, 21, 31 या 51 माला तथा सामर्थ्य अनुसार अधिक संख्या में जाप करना लाभकारी माना गया है।
ग्रह दोष, शनि और राहु के कष्टों से राहत
ज्योतिर्विद् विमल जैन के अनुसार श्रीभैरव जी की उपासना से ग्रहजनित दोषों का शमन होता है। विशेष रूप से शनि और राहु की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती अथवा ढैया से प्रभावित लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।
जो लोग न्यायालय संबंधी विवाद, शत्रु बाधा, राजकीय कष्ट या अनावश्यक परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें भैरव अष्टमी पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और उपवास करना चाहिए।
भैरव भक्तों के लिए रात्रि जागरण, श्री भैरव चालीसा, श्री भैरव स्तोत्र का पाठ तथा भैरव मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव से की गई श्रीभैरव उपासना जीवन में सुख, सौभाग्य और मानसिक शांति प्रदान करती है। ( विमल जैन, हस्तरेखा विशेषज्ञ, रत्न-परामर्शदाता, फलित अंक ज्योतिषी एवं वास्तुविद् एस. 2/1-76 ए, द्वितीय तल, वरदान भवन, टैगोर टाउन एक्सटेंशन, भोजूबीर, वाराणसी-221002,मो. : 09335414722)










