🕌 अजमेर, 26 अक्टूबर | Hello Rajasthan Political Desk
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान रविवार को अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचे, जहां उन्होंने देश की मौजूदा सियासत और अपने खिलाफ हुए मुकदमों को लेकर दर्द भरे शब्दों में अपनी बात रखी।
दरगाह में चादर चढ़ाने के बाद उन्होंने कहा –
“सिर्फ एक मुर्गी चोरी के झूठे आरोप में मुझे 21 साल की सजा और 36 लाख रुपये का जुर्माना दिया गया। क्या मैं इतना बड़ा मुजरिम हूं?”
आजम खान ने कहा कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया, मगर वे अब भी न्याय और संविधान पर पूरा भरोसा रखते हैं।
🕊️ दरगाह में की अमन और इंसाफ की दुआ
आजम खान अपने बेटे अब्दुल्ला आजम खान, करीबी सहयोगी यूसुफ मलिक और अनवर खान के साथ अजमेर पहुंचे।
उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में चादर चढ़ाई और देश में अमन, भाईचारे और इंसाफ की दुआ मांगी।
यह उनकी जेल से रिहाई के बाद पहली दरगाह यात्रा थी।
दरगाह कमेटी ने उन्हें पगड़ी बांधकर सम्मानित किया।

💬 “सियासत अब इंसाफ से दूर हो चुकी है”
दरगाह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजम खान ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा –
“आज आम आदमी परेशान है, गरीब को जिल्लत भरी जिंदगी जीनी पड़ रही है। सियासत इंसाफ से दूर होकर विरोधियों को कुचलने का जरिया बन चुकी है।”
उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक और सामाजिक अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
“मेरी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, चुनौतियां अब भी कायम हैं,” – आजम खान ने दृढ़ स्वर में कहा।
🧭 “साजिशों से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता”
आजम खान ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे केस बनाकर सियासी बदले की भावना से कार्रवाई की गई।
“सच्चाई को कभी दबाया नहीं जा सकता। मुझे और मेरे परिवार को बदनाम करने की कोशिश की गई, लेकिन हम टूटे नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि उनकी सजा राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा थी, परंतु संविधान और इंसाफ में उनका विश्वास अटल है।
🔍 अखिलेश यादव के दौरे के बाद सपा में दिखी सक्रियता
अजमेर में आजम खान की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी राजस्थान के दौरे पर आए थे।
राजनीतिक हलकों में इस दौरे को सपा की बढ़ती सक्रियता और संगठनात्मक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है।
राजस्थान में आगामी चुनावी सत्र को देखते हुए आजम खान की यह यात्रा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।
📜 निष्कर्ष
अजमेर शरीफ दरगाह में आजम खान की भावुक अपील और उनके शब्दों ने फिर से इस बात पर सवाल खड़ा किया है कि राजनीति और न्याय के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो चुकी है।
उन्होंने कहा –
“मैं सियासत नहीं, इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा हूं।”
अजमेर में उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि राजनीतिक संदेश भी दे गई कि आजम खान अब भी मैदान में हैं, और उनकी लड़ाई “अभी खत्म नहीं हुई है।”












