अजमेर। राजस्थान के तीर्थराज पुष्कर में विश्व शांति कल्याण नाथ संप्रदाय के साधुओं की और से 9 धूनी अग्नि तप भीषण गर्मी के बीच पहली बार रुस की महिला की और से तपस्या की जा रही है। यह साधना सदियों से नाथ संप्रदाय की और से की जाती है और यह परंपरा आज भी जारी है। इस तपस्या को जल और अग्नि दोनों के बीच किया जाता है।
इस बार पुष्कर में यह साधना की जा रही है। यह अनोखी और कठिन तपस्या देश-दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुष्कर में यह तपस्या 3 मई से शुरू हुई है और 25 मई तक चलेगी।

नाथ संप्रदाय की यह साधना अत्यंत प्राचीन और कठिन हठ योग परंपरा मानी जाती है। इसमें साधक चारों ओर धधकती अग्नि के बीच बैठकर तपस्या करते हैं। राजस्थान की 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तपती गर्मी में यह साधना करना बेहद कठिन माना जा रहा है। यही वजह है कि विदेशी महिला की यह तपस्या सोशल मीडिया से लेकर आध्यात्मिक जगत तक चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसे देखने के लिए सुबह से ही स्थानीय नागरिक यहां पहुंच जाते है।

रशियन महिला की 21 दिनों तक 9 धूनियों के बीच साधना
मूल रूप से रूस की रहने वाली राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ अजमेर के पुष्कर स्थित छोटी बस्ती श्मशान भूमि में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर 21 दिवसीय अग्नि तपस्या कर रही हैं। वह प्रतिदिन लगभग 3 घंटे 15 मिनट तक 9 धधकती धूनियों के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप करती हैं।

तपस्या के दौरान प्रतिदिन हवन, पूजन और आरती का आयोजन भी किया जा रहा है। 25 मई को इस साधना की पूर्णाहुति के साथ संत भंडारे का आयोजन होगा। यह साधना वह अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सानिध्य में कर रही हैं। बताया जा रहा है कि अन्नपूर्णा नाथ की यह पहली अग्नि तपस्या है, जबकि उनके गुरु इससे पहले चार बार ऐसी तपस्या कर चुके हैं।

रशियन महिला भस्म लेप कर बैठती हैं अग्नि के बीच
इस तपस्या की शुरुआत विधि-विधान से होती है। प्रतिदिन पूजा पाठ करते है। इसके बाद साधना शुरू करने से पहले गुरु और शिष्या दोनों शरीर पर भस्म का लेप करते हैं। इसके बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक अग्नि की धूनियों के बीच योग मुद्रा में बैठकर तपस्या की जाती है।

धूनियों को गोबर के कंडों से प्रज्वलित किया जाता है और प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। अंतिम दिन 108 कंडों का प्रयोग किया जाएगा। इस कठिन साधना के दौरान महिला के पैरों में सूजन भी आ चुकी है, बावजूद इसके वह लगातार तपस्या में लीन हैं।
10 साल पहले अपनाया नाथ संप्रदाय
रशियन महिला राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ बताती है कि करीब 17 साल पहले भारत आई थीं। भारतीय संस्कृति, योग और सनातन परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह बदल लिया। करीब 10 वर्ष पहले उन्होंने नाथ संप्रदाय के योगियों से दीक्षा ली और सांसारिक जीवन त्यागकर साधना का मार्ग अपना लिया।
अब उनका जीवन शिव भक्ति, योग और सेवा को समर्पित है। फिलहाल उनके पास रूसी नागरिकता है और वह टूरिस्ट वीजा पर भारत में रह रही हैं।
रशियन महिला 35 शक्तिपीठों के कर चुकी हैं दर्शन
राधिका योगिनी इस समय 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं और अब तक 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भी दर्शन किए थे। हालांकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में स्थित कुछ शक्तिपीठों तक वह अभी नहीं पहुंच सकी हैं।
उनकी यह तपस्या अब राजस्थान ही नहीं बल्कि विदेशों में भी चर्चा का विषय बन चुकी है। बड़ी संख्या में लोग पुष्कर पहुंचकर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
पुष्कर में रशियन महिला की 21 दिन की अग्नि तपस्या का लाइव वीडियो
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