जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की बेटी नीलिमा अरोड़ा ने साहस, संघर्ष और जुनून की ऐसी मिसाल पेश की है, जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। नीलिमा ने माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) फतह कर इतिहास रच दिया। वे थैलेसीमिया माइनर से पीड़ित दुनिया की पहली महिला बन गई हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सफलता हासिल की।
नीलिमा वर्तमान में कैलिफोर्निया में सिलिकॉन वैलिडेशन इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं और दो बच्चों की मां हैं। खास बात यह है कि करीब ढाई साल पहले तक उनका पर्वतारोहण से कोई संबंध नहीं था। घुटने की सर्जरी के बाद उन्होंने खुद को नई चुनौती देने का निर्णय लिया और उसी सफर ने उन्हें एवरेस्ट तक पहुंचा दिया। 50 दिनों के इस कठिन अभियान के दौरान उन्हें तीन बार हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (हैए) जैसी जानलेवा स्थिति का सामना करना पड़ा।

डॉक्टरों ने कई बार अभियान रोकने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ती रहीं। नीलिमा ने बताया कि 25 मई को दोपहर करीब 1 बजे जब वे एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचीं, तो करीब 30 मिनट तक वे वहां अकेली थीं। उन्होंने इस अनुभव को “जिंदगी का सबसे भावुक और अविश्वसनीय पल” बताया। एवरेस्ट से पहले नीलिमा फ्रांस के मॉन्ट ब्लांक, मैटरहॉर्न, इक्वाडोर के कोटोपाक्सी, अर्जेंटीना के एकॉनकागुआ और नेपाल के अमा डबलम जैसी कठिन चोटियों को भी फतह कर चुकी हैं। वर्ष 2025 में वे 40 वर्ष से अधिक आयु की पहली भारतीय महिला बनी थीं जिन्होंने अमा डबलम पर सफलता हासिल की थी।
नीलिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गाइड गेसमैन तमांग और परिवार को दिया। जयपुर की इस बेटी की उपलब्धि आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो बीमारी या परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।











