🏥 जयपुर, 26 अक्टूबर | Hello Rajasthan News Desk
राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां संत दुर्लभजी अस्पताल ने कथित रूप से बकाया बिल न मिलने पर एक मरीज का शव परिजनों को देने से मना कर दिया।
यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा रविवार सुबह खुद अस्पताल पहुंचे और मौके पर जांच के निर्देश दिए।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
दौसा के बालाजी थाना क्षेत्र निवासी विक्रम मीणा को 13 अक्टूबर को जयपुर के संत दुर्लभजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
परिजनों के मुताबिक, इलाज के दौरान विक्रम ने 6 लाख 39 हजार रुपये का भुगतान किया, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रबंधन ने इसके बाद 1 लाख 79 हजार रुपये के बकाया बिल की मांग की और शव देने से मना कर दिया।
मृतक के परिजनों ने इस पूरे मामले की जानकारी मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को दी, जिसके बाद वे खुद अस्पताल पहुंच गए।
😡 मंत्री मीणा ने जताई नाराज़गी, कहा- “शव रोकना अमानवीय है”
अस्पताल पहुंचने के बाद मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा,
“यह अस्पताल जनता की सेवा के लिए है, न कि लूट के लिए। इसे सरकार ने महज एक रुपये में ज़मीन दी थी। शव रोकना अमानवीय और असंवेदनशील है।”
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा, “हॉस्पिटल प्रशासन ने पैसे न देने के कारण शव को 24 घंटे तक रोके रखा। यह शव के साथ खिलवाड़ है, असंवेदनशील और अमानवीय कृत्य है।”
उन्होंने अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब किया और गांधीनगर थाना पुलिस को शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए। अस्पताल प्रशासन ने मंत्री के हस्तक्षेप के बाद शव देने की अनुमति दी। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्य सचिव को भेजेंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
🧑⚕️ परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप – “बॉडी से बदबू आ रही थी”
मृतक के परिजनों का कहना है कि उन्होंने शनिवार को अस्पताल पर दबाव बनाने के बाद ही शव देखने दिया।
परिजन बोले —
“जब हमने शव देखा तो उसमें से बदबू आ रही थी। हमें शक है कि विक्रम की मौत पहले ही हो चुकी थी और हमें बताया नहीं गया।”
बालाजी थाने के पुलिसकर्मी गोविंद सिंह ने भी पुष्टि की कि
“अस्पताल प्रशासन शव तब तक नहीं दे रहा था जब तक बकाया रकम जमा न हो।”
💰 अन्य मरीजों से भी भारी-भरकम बिल की शिकायतें
मंत्री मीणा के पास अन्य मरीजों के परिजन भी पहुंचे।
- मोनू मीणा, जिन्हें 14 अक्टूबर को अपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था,
उन्होंने बताया कि 24 घंटे के इलाज का 8.5 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया। - महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती काजल का भी लाखों रुपये का बिल बनाया गया।
- वहीं हनुमानगढ़ जिला प्रमुख कविता मेघवाल ने बताया कि उनकी बहू कौशल्या भाटिया का 6 लाख रुपये का बिल बनाया गया है।
🗣️ किरोड़ीलाल मीणा बोले – “यह सरकार को बदनाम करने की साजिश”
अस्पतालों पर कार्रवाई के संकेत देते हुए मंत्री मीणा ने कहा —
“राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री ‘मां योजना’ से इन मरीजों को जोड़ा जाना चाहिए था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा। यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है।”
उन्होंने कहा कि पात्र होने के बावजूद मरीजों को योजना का लाभ नहीं देना गंभीर लापरवाही है, और ऐसे अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल में महुआ निवासी विक्रम का पात्र होने के बावजूद
— Dr. Kirodi Lal Meena (@DrKirodilalBJP) October 26, 2025
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना और राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना उपचार नहीं किया और परिजनों से ₹5.75 लाख ले लिए।
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🚨 सरकार ने मांगी रिपोर्ट, अस्पताल प्रशासन पर कसेगा शिकंजा
राजस्थान सरकार ने इस घटना की रिपोर्ट तलब कर ली है।
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की जांच करेगा कि
- क्या मृतक विक्रम का इलाज मां योजना के अंतर्गत पंजीकृत था या नहीं?
- अस्पताल ने किन नियमों के तहत शव रोकने का फैसला किया?
अगर दोष सिद्ध हुआ, तो अस्पताल के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई की जा सकती है।
📌 निष्कर्ष
जयपुर के संत दुर्लभजी अस्पताल में शव रोकने का मामला एक बार फिर से निजी अस्पतालों की ‘व्यावसायिक मानसिकता’ पर सवाल उठाता है।
मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के हस्तक्षेप के बाद शव तो परिजनों को मिल गया, लेकिन यह प्रकरण राज्य सरकार को स्वास्थ्य योजनाओं की जमीनी स्थिति की हकीकत दिखा गया है।











